जनता की नब्ज पकड़ने में कामयाब हो रहे राहुल

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11 दिसंबर को पांच विधानसभा चुनाव के आये परिणामों ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि मतदाताओं का भरोसा राहुल गांधी के प्रति बढ़ा है। या यूं कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी कि राहुल गांधी जनता की नब्ज को पकड़ने में कामयाब होते नजर आ रहे हैं। छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार चयन से लेकर प्रचार अभियान तक जिस गंभीरता के साथ राहुल गांधी ने रणनीति बनायी और नाराज पार्टी नेताओं से संवाद स्थापित कर उनकी नाराजगी दूर करने का काम किया, उसका प्रभाव परिणाम के रुप में नजर आया। पांच राज्य के चुनाव परिणामों ने यह साबित कर दिया जनता राहुल गांधी को देश का नेता मानने को तैयार होती नजर आ रही है। पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे कांग्रेस पार्टी के लिए ‘अच्छे दिन’ लेकर आये हैं। कहना ना होगा कि यह चुनाव भी मोदी बनाम राहुल ही लड़ा गया था और इसमें राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी को टक्कर दे दी है। कांग्रेस कार्यालयों में जश्न का माहौल है और पहली बार जीत का श्रेय राहुल गांधी और उनकी कड़ी मेहनत को दिया जा रहा है। एक कार्यकर्ता ने तो अति उत्साह में इतना तक कह दिया कि ये लोग पप्पू कहते हैं ना, तो जान लें कि पप्पू अब जवान हो गया है। पार्टी के नेता अपने अध्यक्ष राहुल गांधी को जीत का श्रेय देते हुए कह रहे हैं कि उन्होंने चुनाव वाले पांचों प्रदेशों में कुछ हफ्तों के भीतर 82 सभाएं और सात रोड शो किए थे। कांग्रेस के संगठन महासचिव अशोक गहलोत का कहना है कि इन चुनावों में खासकर राजस्थान में पार्टी के अच्छे प्रदर्शन का श्रेय राहुल गांधी के नेतृत्व को जाता है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान से जुड़े पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक, राहुल गांधी ने 7 अक्टूबर को चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करने के बाद सबसे अधिक 25 जनसभाएं मध्य प्रदेश में कीं। उन्होंने मध्य प्रदेश में 4 रोड शो भी किया था। कांग्रेस अध्यक्ष ने राजस्थान और छत्तीसगढ़ में 19-19 चुनावी सभाओं को संबोधित किया था। इसके अलावा उन्होंने राजस्थान में 2 और छत्तीसगढ़ में एक रोड शो भी किया था। राजस्थान में कांग्रेस पांच साल बाद सत्ता में वापस आयी है तो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ में कांग्रेस 15 वर्षों के बाद भारी बहुमत से सत्ता में वापसी की है। राहुल गांधी ने तेलंगाना में 17 जनसभाएं करके कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन के उम्मीदवारों के लिए वोट मांगे, हालांकि यहां पार्टी को निराशा हाथ लगी। उन्होंने मिजोरम में 2 सभाएं कीं लेकिन यहां कांग्रेस अपनी सत्ता बचाने में नाकाम रही। कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, इस चुनाव का एक बड़ा संदेश यह है कि जनता राहुल गांधी को एक राष्ट्रीय नेता के तौर पर स्वीकार कर रही है। यह आने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस के लिए शुभ संकेत है। मध्य प्रदेश और मिजोरम में 28 नवंबर को मतदान हुआ तो राजस्थान एवं तेलंगाना में 7 दिसंबर को वोट डाले गए। छत्तीसगढ़ में 12 और 20 नवंबर को दो चरणों में मतदान हुआ था।