हम सबके पूर्वज तथा भगवान राम के दास हैं हनुमान

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प्रतापगढ़ । सर्वोदय सद्भावना संस्थान द्वारा रामानुज आश्रम में आज सनातन धर्म के श्री संप्रदाय, रामानंदाचार्य संप्रदाय शैव संप्रदाय एवं सनातन धर्म को मानने वाले अनेक ब्राह्मण एकत्रित हुए। जिन्होंने हनुमान जी के विषय में जो भ्रामक प्रचार किए जा रहे हैं इस पर विचार विमर्श किया । उक्त अवसर पर हनुमान जी एवं श्री रामचरितमानस का पूजन अर्चन किया गया। ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने कहा कि हनुमान जी मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के दास है और हम सभी के पूर्वज हैं। यदि जो लोग कह रहे हैं और जातियों में बांट रहे हैं उन लोगों को चाहिए कि हनुमान जी की मूर्ति अपने घर में स्थापित करें। अपने मोहल्ले में स्थापित करें और हनुमान जी की पूजा-अर्चना करें । उनके बताए रास्ते पर चले। हनुमान जी अपने स्वामी के आदेश का पालन करते थे। हनुमान जी कभी किसी के साथ अन्याय नहीं करते थे ।महिलाओं का सम्मान करते थे। हनुमान जी ज्ञानियों में अग्रगण्य है। हनुमान जी जैसा वीर एवं बुद्धिमान ज्ञानवान कोई नहीं है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम से जब प्रथम बार हनुमान जी मिले तो हनुमान जी ब्राह्मण वेश में मिले । वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान श्री राम लक्ष्मण जी से कहते हैं हे लक्ष्मण यह व्यक्ति बुद्धिमान ,ज्ञानवान और पंडित है इसने जो भी बात किया उसमें एक भी व्याकरण दोष मुझे नजर नहीं आया ।इस प्रकार हनुमान जी को भगवान श्री राम पंडित कहते हैं ।आज जो लोग राजनीति चमकाने के लिए हनुमान जी को धर्म ,वर्ग, जाति में बांट रहे हैं इसकी निंदा की जाती है । कार्यक्रम में मुख्य रूप से आचार्य आलोक मिश्र ,आचार्य कमलेश तिवारी, डॉक्टर शिवेशा नंद ,आचार्य रामानुज दास, पंडित बालमुकुंद जी ,आचार्य रमेश महाराज, पंडित संजय, पंडित अवध नारायण शुक्ला, गिरीश दत्त मिश्रा, बद्री प्रसाद मिश्रा, पंडित अवध नारायण शुक्ला, पंडित हरिशचंद्र शुक्ला सहित अनेको लोगों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए हनुमान जी को एक बाल ब्रह्मचारी, संयमी, क्रोध, ईर्ष्या और अहंकार पर विजय प्राप्त करने वाला महापुरुष बताया तथा भगवान श्री राम के दास के रूप में इस संसार के कल्याण के लिए जब तक प्रलय नहीं आएगा तब तक इस संसार में विराजित रहेंगे । जहां राम कथा होती है वहां पर तुरंत आकर के विराज जाते हैं ।सबका हनुमान जी मंगल करते हैं।