छत्तीसगढ़ में फार्मेसी के विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य अधर में

0
78

रायपुर। युवा पीढ़ी को शिक्षित करने के नाम पर सरकारों द्वारा किस तरह से विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण छत्तीसगढ़ में देखा जा सकता है। यह मजाक किसी और से नहीं बल्कि अपने ही छत्तीसगढ़िया विद्यार्थियों के साथ किया जा रहा है। हम बात शासकीय आयुष विश्वविद्यालय द्वारा संचालित फार्मेसी संकाय में अध्ययन प्राप्त करने के लिए पंजीकृत 74 छात्र-छात्राओं की कर रहे हैं। बता दें शासकीय आयुष विश्वविद्यालय के अन्तर्गत राज्य दो फार्मेसी महाविद्यालय की स्थपना रायपुर और राजनांदगांव में तत्कालीन रमन सिंह सरकार द्वारा की गयी थी। इन महाविद्यालयों में वर्ष 2017 से कक्षाएं प्रारंभ की गयी हैं। दो वर्ष का समय बीत जाने के बाद भी विश्वविद्यालय द्वारा सिर्फ एक सेमेस्टर की सैद्धान्तिक परीक्षा कराई गयी है। जबकि अभी तक तीन सेमेस्टर की परीक्षाएं पूर्ण हो जानी चाहिए थी। इसके चलते पंजीकृत 74 छात्र-छात्राओं का एक वर्ष का महत्वपूर्ण शैक्षणिक समय खराब हो चुका है। यह छात्र-छात्राएं अपने शैक्षणिक भविष्य को लेकर परेशान हैं। गौर करने वाली बात है कि यह सभी 74 छात्र-छात्राएं अपने छत्तीसगढ़ की ही मूल निवासी हैं। राज्य में छत्तीसगढ़ के लोगों को प्राथमिकता देने के नाम पर आये दिन आवाज उठती रहती है पर इन 74 छत्तीसगढ़िया बालक-बालिकाओं के शैक्षणिक भविष्य की चिंता को लेकर कोई आवाज नहीं उठा रहा है। यहां यह भी बताना समीचीन होगा कि यह सभी 74 छात्र-छात्राएं जिन परिवारों के हैं, उनकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। अभिभावकों ने सोचा था कि फार्मेसी की शिक्षा प्राप्त कर उनके बच्चे चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अपना करियर बना सकेंगे पर उनका सपना शायद सपना ही रह जाएगा।

एक ही परिसर में चलती हैं दो महाविद्यालयों की कक्षाएं
रायपुर और राजनांदगांव में स्थापित फार्मेसी महाविद्यालय में से एक के भी पास अभी तक अपना भवन नहीं हैं। दोनों महाविद्यालय की कक्षाएं संयुक्त रुप से रायपुर स्थित शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय परिसर में संचालित की जाती हैं। यहां दोनों महाविद्यालय की कक्षाएं एक साथ लगाई जा रही हैं। मजेदार बात है कि दोनों महाविद्यालय में मात्र दो शिक्षक हैं। अर्थात एक महाविद्यालय में सिर्फ एक शिक्षक पदस्थ किया गया है वह भी पूर्णकालिक नहीं हैं। जो दोनों शिक्षक वर्तमान में छात्र-छात्राओं की कक्षाएं संचालित कर रहे हैं उनकी तैनाती संविदा के आधार पर की गयी है। यहां न तो लैब स्थापित है और न ही लाइब्रेरी है।

लैब न होने से आधे सेमेस्टर की पढ़ाई ठप
स्थापना के दो वर्ष बीत जाने के बाद भी फार्मेसी महाविद्यालय के नाम पर अभी तक लैब नहीं स्थापित की जा सकी है। लैब न होने से आधे सेमेस्टर की पढ़ाई ही नहीं हो रही है। इसी वजह से परीक्षा भी नहीं कराई जा रही है। महाविद्यालय में न तो लाइब्रेरी है और न ही अन्य तकनीकी कर्मचारियों की नियुक्ति की गयी है। महाविद्यालय में यूजीसी और फार्मेसी काउंसिल आॅफ इंडिया के मानकों को भी पूरा नहीं किया गया है। ऐसे में महाविद्यालय की मान्यता छिनने का भी खतरा बना हुआ है।

दो दिन से छात्र-छात्राएं कुलपति कार्यालय के सामने धरने पर बैठे
फार्मेसी महाविद्यालय के 74 छात्र-छात्राएं पिछले दो दिन से आयुष विश्वविद्यालय की प्रभारी कुलपति डॉ. आभा सिंह के कार्यालय के समक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरु मेडिकल कॉलेज में धरने पर बैठे हैं। छात्र-छात्राओं की अगुवाई छत्तीसगढ़ यूथ फार्मासिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल वर्मा और सचिव वैभव शास्त्री कर रहे हैं। छात्र-छात्राओं की मांग है कि फार्मेसी संकाय की पढ़ाई शीघ्र प्रारंभ कराई जाए ताकि उनका शैक्षणिक भविष्य सुरक्षित रह सके।

समस्याओं का जल्द समाधान करेंगे : आभा सिंह
आयुष विश्वविद्यालय की प्रभारी कुलपति डॉ. आभा सिंह ने फार्मेसी महाविद्यालय की समस्याओं के संबंध में कहा कि जल्द ही इस संबंध में प्रभावी कार्रवाई की जाएगी और समस्याओं का समाधान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी उन्होंने यहां का प्रभार लिए ज्यादा दिन नहीं हुए हैं। वह पूरे मामले की अध्ययन कर रही हैं।