शिक्षा और स्कूलों के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर मंथन करेेंगे शिक्षाविद

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रायपुर। शिक्षा के स्वरूप और स्कूलों की कार्यप्रणाली में सुधार के मद्देनजर परिवर्तन लाना और भविष्य के लिहाज से शिक्षा की सुदृढ़ नींव रखना एक निरंतर जारी रहने वाली प्रक्रिया है। सीबीएसई यानी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है। इसी संदर्भ में मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित सहोदय द्वारा प्रत्येक 4 वर्ष में रीजनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जाता है। इस कांफ्रेंस में शिक्षा और स्कूलों के समक्ष आने वाली चुनौतियों और भविष्य के लिहाज से नए कदम उठाने पर विचार-विमर्श किया जाता है। इस बार 15-16 जनवरी को इंदौर में दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन होने जा रहा है। इस बार इस कॉन्फ्रेंस की थीम ‘एजुकेशन फॉर फ्यूचर-फ्यूचर आॅफ एजुकेशन’ पर आधारित है, जिसके अंतर्गत कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा के साथ ही नई नीतियों को लेकर भी विचार विमर्श किया जायेगा। इस संदर्भ में जानकारी देते हुए इंदौर सहोदय स्कूल कॉम्प्लेक्स के चेयरपर्सन मोहित यादव ने बताया कि पिछले कुछ सालों में शिक्षा पद्धति और स्कूलों की कार्यप्रणाली दोनों में ही कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। इनमें रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों के समावेश के साथ ही तकनीकी पहलुओं का जुड़ना मुख्यतौर पर शामिल हैं। कांफ्रेंस में मुख्य वक्ताओं में पूर्व यूजीसी चेयरपर्सन डॉ. वेदप्रकाश, आईआईएम अहमदाबाद की प्रोफेसर डॉ. निहारिका वोहरा, स्पीड लैब्स के संस्थापक व सीईओ विवेक वार्ष्णेय, मैनेजमेंट गुरु एन रघुरामन तथा सायकोलॉजिस्ट डॉ. शिशिर पलासपुरे (मॉर्फिक माइंड्स) शामिल होंगे। आयोजन में अजमेर रीजन के अलावा चेन्नई, हैदराबाद, बिहार, महाराष्ट्र तथा दिल्ली रीजन के स्कूल प्रिंसिपल्स और प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे। विभिन्न स्कूलों के कुल 300 प्रिंसिपल इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे।