प्लास्टिक का इस्तेमाल जिम्मेदारी और समझदारी से हो : उपराष्ट्रपति

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नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू ने गुरुवार को चेन्नई में कहा कि प्लास्टिक को जिम्मेदारी और समझदारी से इस्तेमाल करना चाहिए तथा इस्तेमाल के बाद उसे उचित तरीके से री-साइकिल किया जाना चाहिए। वे सेंट्रल इंस्टीट्यूट आॅफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिपेट) के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह संस्थान प्लास्टिक और सहयोगी उद्योगों के विकास का काम करता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक तरफ बेहतर भौतिक सुविधाओं के जरिए जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास हो रहा है, तो दूसरी तरफ प्लास्टिक के अंधाधुंध इस्तेमाल से खतरा पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक को री-साइकिल करने और प्लास्टिक उत्पादों के दोबारा इस्तेमाल के विषय के बारे में लोगों में जागरूकता और शिक्षा जरूरी है। श्री नायडू ने पर्यावरण का उल्लेख करते हुए कहा कि प्लास्टिक उत्पादों के टिकाऊपन और लम्बे समय तक उसके कायम रहने से पर्यावरण को गंभीर खतरा है। उन्होंने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि एक बार इस्तेमाल की जाने वाली प्लास्टिक सामग्री को लैंडफिल के लिए लगातार इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि फालतू प्लास्टिक का ढेर हर जगह नजर आता है, जिसके मद्देनजर यह आवश्यक है कि हम प्लास्टिक का इस्तेमाल जिम्मेदारी से करें और उसे सही तरीके से री-साइकिल करें। उपराष्ट्रपति ने सिपेट को बधाई दी कि संस्थान ने 50 वर्षों के दौरान हजारों मशीन आॅपरेटरों, तकनीशियनों और पॉलिमर इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक और प्लास्टिक आधारित उत्पाद विश्व अर्थव्यवस्था के अभिन्न और महत्वपूर्ण अंग हैं। इसका कारण यह है कि प्लास्टिक कम वजन वाला, टिकाऊ और बहुपयोगी होता है। उन्होंने सिपेट को सुझाव दिया कि प्लास्टिक को री-साइकिल करने और प्लास्टिक उत्पादों के दोबारा इस्तेमाल के विषय के बारे में लोगों में जागरूकता पैदा करने और उन्हें शिक्षित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा और तमिलनाडु के मछलीपालन एवं कार्मिक तथा प्रशासनिक सुधार मंत्री डी जयकुमार, सांसद जे जयवर्धन और अन्य विशिष्टजन उपस्थित थे।