कथाकार दिवाकर को मिला श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान

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नई दिल्ली। उर्वरक क्षेत्र की प्रमुख संस्था इफको द्वारा वर्ष 2018 का श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान वरिष्ठ कथाकार रामधारी सिंह दिवाकर को प्रदान किया गया है। उन्हें यह सम्मान गुरुवार को नई दिल्ली के एनसीयूआई आॅडिटोरियम में आयोजित एक समारोह में सुविख्यात साहित्यकार मृदुला गर्ग ने प्रदान किया। विशिष्ट अतिथि के तौर पर जिलियन राइट की मौजूदगी में पुरस्कार स्वरूप रामधारी सिंह दिवाकर को एक प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति पत्र और 11 लाख रुपए की राशि प्रादन की गई है। समारोह के दौरान वरिष्ठ कथाकार रामधारी सिंह दिवाकर ने ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाली का जिक्र करते हुए कहा, मैं 70 फीसदी वाले उस गांव का लेखक हूं, जहां तकरीबन 20 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे रहते है। मैं उस गांव का लेखक हूं, जहां कृषि कर्म पर निर्भर, अपने भाग्य को कोसते, कर्ज में डूबे, खेती से भी लागत खर्च न निकाल पाने वाले किसान रहते हैं। उन्होंने आगे कहा, लाखों-लाख की संख्या में जहां के मजदूर रोजी-रोटी की तलाश में पलायन करते हैं, जहां की आबादी से देश-प्रदेश की शासन सत्ता बनती बदलती है, जहां हाथों में मोबाइल फोन लिए नौकरी-रोजगार की तलाश में नौजवानों की विशाल आबादी आश्वासनों के सपने संजोए भौंचक सी खड़ी है, गांव के उसी दिशाहीन चौराहे पर खड़ा मै एक हिंदी का लेखक हूं। इस दौरान एफको के प्रबंध निदेशक उदय शंकर अवस्थी ने बताया कि लेखक एवं पूर्व सांसद देवी प्रसाद त्रिपाठी की अध्यक्षता में गठित निर्णायक मंडल ने रामधारी सिंह दिवाकर का चयन खेती-किसानी वाले ग्रामीण यथार्थ पर केंद्रित उनके व्यापक साहित्यिक अवदान को ध्यान में रखकर किया है। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष दिया जाने वाला यह प्रतिष्ठित पुरस्कार किसी ऐसे रचनाकर को दिया जाता है, जिसकी रचनाओं में ग्रामीण और कृषि जीवन से जुड़ी समस्याओं, आकांक्षाओं और संघर्षों को मजबूती के साथ रखा गया हो। मूर्धन्य कथाशिल्पी श्रीलाल शुक्ल की स्मृति में वर्ष 2011 में शुरू किया गया यह सम्मान अब तक विद्यासागर नौटियाल, शेखर जोशी, संजीव, मिथलेश्वर, अष्टभुजा शुक्ल, कमलाकांत त्रिपाठी, और रामदेव धुरंधर को प्रदान किया गया है। सम्मानित साहित्यकार को एक प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति पत्र और 11 लाख रुपए की राशि प्रदान की जाती है।