वित्तमंत्री का अंतरिम आम बजट पूरी तरह चुनावी बजट है : विशम्भर प्रसाद निषाद

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नई दिल्ली। सामाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्य सभा सांसद विशम्भर प्रसाद निषाद ने अंतरिम आम बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पीयूष गोयल द्वारा प्रस्तुत बजट पूरी तरह से चुनावी बजट है। बजट में हर तबके को छूने की कोशिश किया गया है पर सबसे बड़ी बात यह है कि उसका पैसा आने वाली सरकार के ऊपर डाल दिया गया है। इसी प्रकार ये वर्ष 2014 के आम चुनाव में जनता से कई झूठे वायदें करके आए थे, पर पूरे साढे चार साल के दौरान उन वायदों को पूरा करने के लिए ये सरकार कोई कार्य नहीं किया। संविधान में चुनी गई सरकार को 5 साल का बजट पेश करने का अधिकार है, परंतु वायदा खिलाफी का एक और तरीका निकाते हुए इन्होंने 6 आम बजट प्रस्तुत कर दिया। अगर नियमों का अनुपालन होता तो यह पूर्ण बजट वर्ष 2019 के आम चुनाव के बाद प्रस्तुत किया जाता।
बजट में उज्जवला योजना के तहत बड़ी-बड़ी बातें की गई हैं लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है। जिन गरीबों को फ्री गैस सिलेंडर देने की बात बजट भाषण में कही गयी है। वह गरीबों के साथ मजाक है। 50 फीसदी से ज्यादा इस योजना के तहत प्राप्त गैस कनेक्शनधारक दूसरा या तीसरा गैस सिलेंडर नहीं भरवाए है। क्योंकि गैस सिंलेंडर इतना अधिक महंगा कर दिया गया कि उनकी माली हालत ऐसा करने के लिए उन्हें इजाजत नहीं दी। ऊपर से यह नीयम लगा दिया गया कि गैस का पूरा पैसा दो और सिब्सिडी की राशि उनके खाते में स्थानांतरित होगी, जो ज्यादातर गरीबों के खाते में टेक्नाॅलाॅजी की गड़बड़ी के कारण नहीं गई। न गरीब के पास पूरा पैसा होगा और न वह गैस सिलंेडर लेगा। सब कुछ टेकनाॅलोजी के हवाले नहीं किया जा सकता। बजट में किसानों को प्रति 2 एकड़ जोत वाले किसानों को वर्ष 6000 रूपए वर्ष 2019 के आम चुनाव के बाद देने की बात कही गई है। इसी प्रकार आम चुनाव 2014 में हर भारतीय के खाते में 15 लाख रूपए चुनाव बाद देने का वायदा भाजपा द्वारा किया गया था जो आज तक पूरा नहीं हुआ और यदि 15 लाख का बयाज भी निकाल लें तो 6 हजार से ज्यादा प्रति वर्ष आएगा। इसीलिए मैं कह रही ही हूं कि यह बजट मोदी सरकार का मात्र चुनावी बजट है।बजट में असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए बीमा के माध्यम से पेंशन देने की बात कही गई है और बीमा के एवज में प्रतिमाह बीमाधारकों से 7 सौ से 12 सौ वार्षिक लेने की बात है, तब जाकर उन्हें पेंशन मिलेगा। मैं कहना चाहता हूं कि जो काम बीमा कंपनियों और बीमा एजेंटों का है वह काम आम बजट में वित्तमंत्री जी कर रहे हैं। आज भी कई बीमा कंपनियों पेंशन योजना के तहत पेंशन दे रही है, इसमें नई बात कुछ भी नहीं है। यह मात्र छलावा है। इसी प्रकार रेलवे द्वारा प्रति यात्री दुर्घटना बीमा कुछ वर्षों से किया जा रहा है। जिसमें बीमा कंपनियों को अरबों रूपए का फायदा हो रहा है। सांसद आदर्श ग्राम योजना प्रधानमंत्री की विशेष योजना है, पर खेद की बात है कि इस योजना के तहत बीते साढ़े चार साल में एक भी रूपया आवंटित नहीं किया गया। इसी प्रकार इस सरकार की अन्य योजनाओं का हाल है। बजट में एलईडी बल्व 143 करोड बांटने का कीर्तिमान स्थापित किया गया है जबकि आबादी 130 करोड है। यानी हर नागरिक को एक से ज्यादा एलईडी बल्व भाजपा सरकार बांटी है, जो जुमला प्रतीत हो रहा है। नोटबंदी के बाद जिस प्रकार देश में बेरोजगारी बढ़ी है वैसी बेरोजगारी 45 वर्षों में देश में कभी नहीं हुआ। इससे व्यायसाय एवं व्यावसायी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं जो आज तक इसकी मार से नहीं उभर पाए हैं।