भक्त के पास स्वयं चल कर आते हैं भगवान :ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास

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प्रतापगढ़। श्रृंगवेरपुर के पावन धरा में मौनी अमावस्या की पावन पुण्य तिथि पर गंगा स्नान के पश्चात ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास द्वारा तीर्थ पुरोहित गोधन महाराज एवं तीर्थ पुरोहित संघ के अध्यक्ष तथा ग्राम प्रधान पंडित काली सहाय त्रिपाठी को अंगवस्त्रम एवं माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया । भंडारे के पश्चात आपने कहा कि श्रृंगवेरपुर वह पावन धरा है जहां पर भगवान श्री राम माता सीता लक्ष्मण और सुमंत जी सहित वन जाते समय पधारे थे। इसी श्रृंगवेरपुर धाम में श्रृंगी ऋषि जिन्होंने वशिष्ठ जी के कहने पर अयोध्या में महाराज दशरथ का पुत्र कामेषटि यज्ञ कराया था । अग्नि देवता द्वारा जो खीर प्रदान की गई थी। उससे राम, लक्ष्मण, भरत ,शत्रुघ्न तथा उसी से हनुमान जी का भी अवतरण हुआ था । श्रृंगी ऋषि अपनी पत्नी शांता जो महाराज दशरथ की पुत्री थी जिन्हें महाराज रोम पाद ने गोद ले लिया था यही प्रवास करती है । केवट जो भगवान का दास है उसे गले लगाया और केवट ने भगवान के चरणों को धोकर के सबसे पहले अपने परिवार और पितरों को बैकुंठ लोक जाने के लिए भगवान से प्रार्थना किया । वन की ओर जाते समय सर्वप्रथम केवट को दर्शन देने के लिए भगवान श्री राम यहां पधारे। ऋषि-मुनियों को बाद में दर्शन दिया। यही से गंगा पार करने के पश्चात संगम तट पर भरद्वाज आश्रम भगवान पधारे । भगवान कहते हैं हे कमला मैं अपने भक्तों का दास हूं। भक्त मेरे मुकुट मणि है। प्रभु श्री राम की दयालुता, करुणा को प्राप्त करके केवट भगवान के आने का इंतजार किया। 14 वर्ष व्यतीत होने के पश्चात पुन: भगवान के राज्याभिषेक में शामिल हुआ। प्रयाग महात्मय के अनुसार प्रयाग पांच योजनाओं तक है।श्रृंगवेर पुरानी प्रयाग के अनतरगत आता है। कार्यक्रम में मुख्य रूप से पंडित गिरिजेश तिवारी, गिरीश दत्त मिश्रा ,पंडित राम बली तिवारी, पंडित केशव प्रसाद त्रिपाठी, पंडित श्याम त्रिपाठी शास्त्री, घनश्याम पांडे सहित अनेक भक्तगण उपस्थित रहे।