हाय और बाय-बाय करना भारतीय संस्कृति नहीं

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रायपुर। विद्या वह है जो व्यक्ति को झुकना सिखाएं लेकिन आज की विद्या मनुष्य को अकड़ना सिखाती है। उसी का परिणाम है कि आज समाज में कोई भी व्यक्ति झुकना नहीं चाहता। विद्या विनय शीलता सिखाती है जिससे जीवन में विनम्रता आती है लेकिन आज विनम्रता और झुकना दोनों लुप्त होते जा रहे है। संतश्री शंभूशरण लाटा महाराज ने कांदुल दुर्गा मंदिर परिसर में चल रही रामकथा के चौथे दिन ये बातें श्रद्धालुजनों को बताई। उन्होंने कहा कि भगवान भाव के भूखे है और वो भी अंदर के भाव में भूखे है, भाव दिखाने के लिए नहीं होना चाहिए। भगवान को प्राप्त करना बड़ा आसान है, भगवान से चाहे जो भी संबंध जोड़ लो भगवान पकड़ में आ जाऐंगे। भगवान को हृदय के भाव से संबंध जोड़ों तो ही भगवान सब कुछ बनने को तैयार है। भगवान हमारे है और हम भगवान को इतना ही मानते हुए जीवन में कार्य करें संसार में सारे सुख प्राप्त हो जाएंगे। क्योंकि भगवान से संबंध स्थापित होने पर उनकी कृपा भी बरसनी शुरू हो जाती है। भगवान से दूर होते ही भगवान वहां से चले जाते है। हाय और बाय-बाय करना भारतीय संस्कृति नहीं है आज के युग में बच्चों युवाओं की क्या बात है यहां तक कि घर के वरिष्ठजन भी अपने नाती-पोते को हैलो-हाय और बाय-बाय करते है। राम-राम करके प्रणाम करने की संस्कृति रही ही नहीं, प्रणाम करने से परिणाम बदल जाते है। लाटा महाराज ने कहा कि पहले संकट आने पर सभी बुराई जाती थी जिसमें संत भी बुलाए जाते थे लेकिन आज स्थिति ऐसी नहीं रही। संकट से निवृत्ति कैसी हो यह भी संत बताते है। संत वो होते है जो दूसरों को चाहते है, संत कभी किसी को मारते नहीं है, किसी के लिए बुरा सोचते भी नहीं।