प्रतापगढ़ में पुलिस की मौजूदगी में ग्रामीणों ने तेंदुए को मौत के घाट उतारा

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प्रतापगढ़ । उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़ जिले के मानधाता कोतवाली इलाके के कुशफरा जंगल मे ग्रामीणों ने पुलिस की मौजूदगी में तेंदुए को मौत के घाट उतार दिया। ग्रामीणों का कहना है कि शिकारियों की जाल में तेंदुए के फंसे होने की जानकारी पहुंची। इलाकाई ग्रामीणों की भीड़ ने इस बात की सूचना शनिदेव पुलिस चौकी को दी तो चौकी इंचार्ज भी मौके पर पहुच गए और जाल को और कसवाने लगे ताकि तेंदुए को काबू किया जा सके। साथ ही वन विभाग के उच्चाधिकारियो को सूचना दी गई तो आननफानन डीएफओ सहित कर्मचारी मौके पर पहुच गए। कुछ ही पलों में तेंदुए की मौत हो गई। बन विभाग की टीम ने तेंदुए के शव को कब्जे में लेकर जिला मुख्यालय चली गई जहा डॉक्टरों का पैनल पोस्टमार्टम कर आगे की कार्यवाई तय की जाएगी। बता दे कि भीड़ ने पहले भी जाल में फंसे तेंदुए को लाठी डंडो से जमकर पीटा था इतना ही नही उसके पंजे के नाखून तक अलग कर दिए गए थे जिससे लगता है कि कही ये जानवरो के अंगों के तस्करों ने तो ये काम नही किया। ये कोई पहला मामला नही है जब जिले में तेंदुए की भीड़ ने हत्या की हो इसके पहले भी बाघराय कोतवाली इलाके में ग्रामीणों ने ट्यूबबेल के कुएं में गिरे तेंदुए को पुआल डालकर जिंदा जलाकर हत्या कर दी थी। इससे पहले भी एक तेंदुए को कानपुर से आई टीम ने जिंदा पकड़ कर कानपुर जू ले गई थी। जिले में आये दिन तेन्दुओ के चलते दहशत बनी रहती है। बावजूद इसके वन विभाग की गश्त जंगलों और उसके आसपास के इलाकों में कभी नजर नही आती। हादसों के बाद मुकदमा दर्ज करवा कर हाथ पर हाथ रख कर अधिकारी बैठ जाते हैं। इस बाबत डीएफओ बीके अहिरवार बिना पोस्टमार्टम के ही दम घुटने से मौत का दावा कर रहे है जबकि भीड़ के हाथों में लाठी डंडे है और तेंदुए को दबोचे बैठे हैं। अब देखने वाली बात है कि इस मामले क्या कार्यवाई होती है और जिम्मेदार अधिकारी कब जागते हैं।