हार्ट के पीछे से साढ़े तीन किलो का जटिल ट्यूमर डॉक्टरों ने निकाला

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पं. जवाहर लाल नेहरु स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से सम्बद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट के डॉक्टरों द्वारा एक बार फिर हृदय के पीछे स्थित अत्यंत जटिल ट्यूमर की सफलतम सर्जरी करके 30 वर्षीय महिला मरीज को जीवनदान दिया गया। एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू की टीम ने हृदय के ठीक पीछे स्थित गांठ जिसे चिकित्सकीय भाषा में पोस्टेरियर मेडिस्टाइनल ट्यूमर कहते हैं, की राज्य में संभवत: प्रथम सर्जरी की है। डॉ. साहू के मुताबिक साढ़े तीन किलो का ट्यूमर जो कि हार्ट के पीछे स्थित था, बहुत ही दुर्लभ किस्म का ट्यूमर होता है। राज्य में पहली बार इस तरह के ट्यूमर का आपरेशन हुआ और वह भी राज्य स्थापना दिवस यानी एक नवंबर को, जो कि शासकीय संस्थान की एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर दर्ज हुआ है। बुधवार को मरीज की सर्जरी का बारहवां दिन रहा और वह स्वस्थ्य होकर घर जाने को तैयार है।

सांस लेने में थी तकलीफ
मुंगेली निवासी मरीज पुनीता को पिछले चार महीने से सांस लेने में काफी तकलीफों का सामना करना पड़ता था। यहां तक कि भोजन निगलने की परेशानी के साथ-साथ लगातार खांसी की समस्या बनी हुई थी। मरीज को मुंगेली जिला चिकित्सालय में दिखाने के बाद डॉक्टरों ने सिम्स बिलासपुर रिफर कर दिया। जहां पर मेडिसीन के विभागाध्यक्ष डॉ. लखन सिंह ने एक्स-रे में हार्ट के पास ट्यूमर दिखाई देने पर सीटी स्कैन कराया। रिपोर्ट देखने में समझ आया कि हार्ट के पीछे में ट्यूमर स्थित है। इसके बाद मरीज को एसीआई के कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जन डॉ. साहू जो कि हफ्ते के दूसरे शुक्रवार और शनिवार को सिम्स के कार्डियक ओपीडी में जाते हैं, को दिखाया। डॉ. साहू द्वारा सीटी स्कैन रिपोर्ट देखकर ट्यूमर के आकार का पता लगाया गया।

इस तरह की गई सर्जरी
चूंकि ट्यूमर हार्ट के ठीक पीछे से निकलकर दायें फेफड़े तक फैला हुआ था इसलिए सर्जन की टीम ने दायें फेफड़े के पांचवी पसली के ऊपर चीरा लगाकार फेफड़े के अंदर प्रवेश किया। दायें फेफड़े को बचाते हुए और ट्यूमर से अलग करते हुए हार्ट के पीछे सावधानीपूर्वक पहुंचा गया। ट्यूमर को आसपास के टिश्यू से अलग करते हुए ट्रेकिया और इसोफेगस से बहुत ही सावधानी पूर्वक अलग किया गया। हार्ट को सुरक्षित बचाते हुए डायफ्रॉम की गतिशीलता को नियंत्रित करने वाले फेनिक नर्व को बचा लिया गया। आॅपरेशन के दौरान सुपीरियर वेन्कॉवा (शरीर से अशुद्ध रक्त को लेकर आने वाली नली) और एफाइगस वेन को रिपेयर किया गया क्योंकि ट्यूमर इन सभी नसों के साथ चिपका हुआ था। मरीज को सर्जरी के दौरान कोई नुकसान नहीं हुआ।

वाइटल आर्गन थे ट्यूमर के चपेट में
हार्ट दो फेफड़ों के मध्य स्थित होता है जिसे मेडिस्टाइनल कहते हैं इसमें हार्ट के ऊपर वाला हिस्सा एंटेरियर मेडस्टाइनल और पीछे वाला पोस्टिरियर मेडिस्स्टाइनल कहलाता है। डॉ. कृष्णकांत साहू के मुताबिक पोस्टेरियर मेडिस्टाइनल तक पहुंचकर सर्जरी करना अपने आप में चुनौती पूर्ण होता है क्योंकि शरीर के लगभग समस्त वाइटल आर्गन जैसे- हार्ट, फेफड़ा, ट्रेकिया, इसोफेगस, सुपीरियर वेन्कॉवा, थोरेसिक डक्ट, डायफ्रॉम, खून की नलियां इसी से जुड़े होते हैं। इस ट्यूमर ने भी शरीर के उपरोक्त सभी अंगों को अपनी चपेट में ले लिया था।

विशेषज्ञों की टीम
हार्ट से जुड़ी इस सर्जरी को सफल बनाने वाली टीम में कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू, एनेस्थिसिया विशेषज्ञ डॉ. ओमप्रकाश सुंदरानी रेडियोडॉग्नोसिस के प्रोफेसर डॉ. विवेक पात्रे, डॉ. रमेश (जूनियर रेसीडेंट सर्जरी) के साथ-साथ सहयोगी नर्सिंग स्टॉफ राजेन्द्र साहू व चोवाराम साहू शामिल हैं।