बिगड़ती जीवनशैली के कारण बढ़ रहे हैं गुर्दारोग के मरीज

0
18

रायपुर। कुछ सालों पहले तक विरले ही हम लोग गुर्दारोगों के बारे में सुना करते थे लेकिन आज-कल की तेजी से बदलती जीवनशैली एवं असंतुलित खानपान के कारण आये-दिन गुर्दारोग के नए मरीज सामने आरहे हैं। यहाँ तक कि पहले जहाँ इस बीमारी को उम्रदराज लोगों में ही देखा जाता था वहीं आजकल युवावस्था में भी यह समस्या देखी जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक इस समय विश्वभर में लगभग 85 करोड़ लोग किडनी की बीमारी से ग्रस्त हैं जिनमें से हर साल लगभग 41 लाख लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। इसीलिए प्रतिवर्ष मार्च के दूसरे गुरुवार को विश्व किडनी दिवस मनाया जाता है ताकि जनसामान्य को किडनी रोगों के कारणों एवं बचाव के तरीकों के बारे में जागरूक किया जा सके। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी एनएच एमएमआई नारायणा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में विश्व किडनी दिवस मनाया गया। हॉस्पिटल के डॉक्टर्स के लिए एक खास क्विज कम्पटीशन का आयोजन भी किया गया जिसमें डॉक्टर्स ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। हॉस्पिटल के किडनीरोग एवं गुर्दा प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ सुनील धमार्नी ने गुदार्रोगों के बारे में कुछ जानकारियाँ साझा की। किडनी रोग मुख्यत: 2 प्रकार के होते हैं। एक्यूट किडनी रोग एवं क्रोनिक किडनी रोग। एक्यूट किडनी रोग के मामले में सिर्फ कुछ ही घंटों के अन्दर गुर्दे काम करना बंद कर देते हैं। यह अक्सर उन लोगों को होता है जो पहले से ही गंभीर रूप से बीमार हैं या किसी अन्य बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती होते हैं। इसके विपरीत, क्रोनिक किडनी रोग धीरे-धीरे कई सालों के दौरान बढ़ते हैं और अक्सर गुर्दों को स्थायी रूप से क्षति पहुँचाते हैं।

किडनी रोगों के लक्षण

  • मूत्र की मात्रा कम होना
  • पैरों में सूजन आना
  • बिना किसी कारण के सांस फूलना
  • थकान
  • उल्टी या मितली आना (विशेषकर सुबह के समय)

किडनी रोगों का कारण क्या होता है?
किडनी रोगों के पीछे सबसे बड़ा कारण है डायबिटीज, जिसके बाद नंबर आता है हाई ब्लड प्रेशर। इनके अलावा कुछ संक्रमण एवं अनुवांशिकता के कारण भी किडनी रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
खानपान की अनियमितता एवं कसरत की कमी के कारण डायबिटीज और हाई ब्लडप्रेशर का खतरा बढ़ जाता है जो अंतत: गुदार्रोगों का कारण बनते हैं।

किडनी रोगों से कैसे बचें?
किडनी रोगों से बचने के लिए सबसे जरूरी है डायबिटीज एवं ब्लड प्रेशर पर कंट्रोल करना। इन परकाबू पाने के लिए सबसे जरूरी है सही खानपान और नियमित व्यायाम। खाने में नमक की मात्रा कम करके और तम्बाखू एवं अल्कोहल से दूर रहकर गुर्दा रोगों का जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके अलावा अगर किसी के परिवार के सदस्यों को हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज या गुर्दा रोग की समस्या है तोउन्हें नियमित रूप से जाँच करानी चाहिए। रीनल फंक्शन टेस्ट एवं सीरम क्रिएटिनिन टेस्ट की मदद से समस्या बढ़ने के पहले ही समय पर किडनी रोगों की जाँच की जा सकती है और समय पर ईलाज शुरू किया जा सकता है जिससे मरीज को डायलिसिस या गुर्दा प्रत्यारोपण से बचाया जा सकता है।