साध्वीद्वय के चातुर्मास समापन पर दिखा श्रद्धालुओं का स्नेह

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रायपुर। आषाढ़ गुरु पूर्णिमा से टैगोरनगर श्री लालगंगा पटवा भवन में चल रहे साध्वीद्वय डॉ. विजयश्रीजी एवं तरुलताश्रीजी के चातुर्मासिक प्रवचन का शुक्रवार को समापन हुआ। इस अवसर पर टैगोर नगर श्रमण संघीय परिवार से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का श्रमण संघीय परिवार के सदस्यों ने सम्मान किया। चातुर्मास समिति के अध्यक्ष रामचन्द्रजी पींचा ने उन प्रत्येक जन की याद की, जिनका सहयोग किसी न किसी रूप में चातुर्मास को सफल बनाने में मिला हो। इस समापन समारोह में साध्वी डॉ. विजयश्रीजी ने उपस्थित धर्मश्रद्धालु जनसमूह को अपने उद्बोधन से स्नेहासिक्त कर दिया। साध्वी ने पटवा परिवार के स्मृति शेष हुकुमचंद पटवा का स्मरण करते हुए कहा कि रायपुर का चातुर्मास मुझे हमेशा याद रहेगा क्योंकि जिस स्थान पर यह चातुर्मास सम्पन्न हुआ है उसके प्रमुख हुकुमचंद का धर्म के प्रति समर्पण भाव उनके सम्पूर्ण परिवार का इस धर्मकार्य को पूर्ण करने की आत्मिक तत्परता मुझे याद रहेगी। इस चातुर्मास में अनेक धर्मप्रेमियों ने लगातार उपवास, आयम्बिल, एकासना, बेला, तेला कर जो चातुर्मास का नाम रोशन किया उनके प्रति उनका स्नेह बरबस छलक रहा था। इस चातुर्मास के अन्तर्गत ही विजय कुमार संचेती ने अपना 25वां मासखमण का उपवास पूर्ण किया जिन्हें मुम्बई में श्री सम्मानित किया गया। गुरुवर्या ने उनके तप की प्रसंशा करते हुए कहा कि हमारा तो यहां से अन्य जगह विहार हो जाएगा, लेकिन धर्म की ज्योति जो इस स्थान पर जली है वह हमेशा अनवरत इस जगह पर जारी रहेगी यह हमे भरोसा है। साथ ही अन्त में उन्होंने समस्त धर्मसभा में उपस्थित धर्मश्रद्धालुओं से यह कहते हुए क्षमा याचना की कि यदि अकस्मात हमसे किसी सन्दर्भ में कुछ ऐसे वचन निकल गए हों जिससे किसी को पीड़ा पहुंची हो तो हम उसके लिए समस्त धर्म श्रद्धालुओं से क्षमा मांगते है।