नई दिल्ली, 28 दिसंबर 2025। सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक 100 करोड़ नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्रदान करना है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और आने वाले समय में विदेश में काम करने वाले भारतीय कर्मचारी भी इसकी सेवाओं का पूरा लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रमिकों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने में ईपीएफओ की भूमिका केंद्रीय है और यह संगठन देश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ बन चुका है।
डॉ. मांडविया ने बताया कि वर्तमान में ईपीएफओ के पास लगभग 28 लाख करोड़ रुपये का विशाल कोष है, जिस पर 8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि श्रमिकों की गाढ़ी कमाई ईपीएफओ के पास सुरक्षित है, तो वह भारत सरकार की गारंटी के साथ है। मंत्री ने ईपीएफओ कार्यालय को “श्रमिक का मंदिर” बताते हुए कहा कि ईमानदारी, पारदर्शिता और मूल्यों के साथ काम करने से ही श्रम शक्ति का वास्तविक सम्मान संभव है।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव आया है। वर्ष 2014 से पहले अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के आंकड़ों के अनुसार देश में केवल 19 प्रतिशत आबादी ही सामाजिक सुरक्षा के दायरे में थी, जबकि आज यह कवरेज बढ़कर 64 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह बदलाव सरकार की नीतियों, योजनाओं और डिजिटल सुधारों का परिणाम है।
उन्होंने बताया कि आज भारत में 94 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े हुए हैं। इस उपलब्धि के साथ भारत, चीन के बाद सामाजिक सुरक्षा कवरेज के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) और अंतरराष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ (आईएसएसए) जैसे प्रतिष्ठित वैश्विक संगठन भी भारत की इस प्रगति की सराहना कर रहे हैं।

















