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एनआईटी में अब उद्योग केन्द्रित होंगे पीएचडी कोर्स

एनआईटी में अब उद्योग केन्द्रित होंगे पीएचडी कोर्स

नई दिल्ली, 14 जनवरी 2026। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में अब पीएचडी कोर्सेस उद्योग केन्द्रित होंगे। नवाचार को प्राथमिकता दी जाएगी। शोध कार्यक्रमों को बढ़़ावा मिलेगा। यह निर्णय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी, विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों (एनआईटीएसईआर) की परिषद की 13वीं बैठक में लिया गया। 13 जनवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में परिषद की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने की।

इस बैठक से पहले भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थानों (आईआईएसआर) की स्थायी समिति की तीसरी बैठक भी हुई। धर्मेंद्र प्रधान ने शैक्षणिक और अनुसंधान मानकों को उन्नत करने, शासन दक्षता बढ़ाने और नवाचार एवं उद्यमिता को और बढ़ावा देने से संबंधित प्रस्तुतियों की समीक्षा की।

केंद्रीय मंत्री ने पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि हमारे पीएचडी कार्यक्रम उद्योग-केंद्रित होने चाहिए। उन्होंने नए और उभरते रोजगार पदों और 21वीं सदी की आवश्यकताओं के आधार पर पाठ्यक्रम विकसित करने के लिए उद्योग-नेतृत्व वाली पाठ्यक्रम समिति के गठन का भी सुझाव दिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारे प्रमुख तकनीकी संस्थानों को भी मान्यता प्रणाली के अंतर्गत आना चाहिए।

बैठक में लिए गए फैसले

  • उद्योग 4.0, ग्रीन हाइड्रोजन, विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा, क्वांटम तकनीक और सेमीकंडक्टर्स जैसी महत्वपूर्ण एवं उभरती तकनीकों के अनुरूप पाठ्यक्रम होंगे।
  • उद्योग की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप विशेषीकृत स्नातकोत्तर और एम.टेक कार्यक्रम होंगे।
  • संकाय के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें पीएचडी असाइनमेंट सौंपा जाएगा।
  • परिषद ने रोजगार चाहने वालों से रोजगार सृजनकर्ताओं में परिवर्तन को सक्षम बनाने के लिए मजबूत नवाचार और उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के महत्व पर भी जोर दिया।

10 एनआईटी में खुलेंगे अनुसंधान पार्क

बैठक में 13 ऐसे एनआईटी, जहां वर्तमान में इनक्यूबेशन सेंटर नहीं है, उन्हें तुरंत इसे स्थापित करने को कहा गया। 10 एनआईटी को तुरंत एक अनुसंधान पार्क की स्थापना शुरू करने का निर्देश दिया गया। यह भी कहा गया कि राष्ट्रीय एवं औद्योगिक संस्थानों (एनआईटी) में विकसित स्टार्टअप्स के लिए निवेशकों और उद्योग जगत के हितधारकों के सहयोग से जुलाई 2026 में एक पिचिंग सम्मेलन का आयोजन करें।

इन बिंदुओं पर बनी सहमति

  • बाह्य सहकर्मी समीक्षा को 1 वर्ष के भीतर पूरा करेंगे।
  • एक मुख्य क्वालिटी एश्योरेंस मैकेनिज्म के तौर पर एक्रेडिटेशन को महत्व देंगे।
  • संस्थान नेशनल एक्रेडिटेशन फ्रेमवर्क (एनएएसी) में एक्टिव रूप से भाग लेंगे।
  • भारतीय भाषाओं के उपयोग के माध्यम से समावेशिता को बढ़ावा देंगे।
  • बहुभाषी शिक्षा के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाएंगे।
  • विभिन्न भाषाई पृष्ठभूमि के शिक्षार्थियों को प्रभावी ढंग से सीखने में सक्षम बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे।