• Home
  • देश
  • भारत ने ग्लोबल एनर्जी सेक्टर में अपनी भूमिका को और मजबूत किया
इंडिया एनर्जी वीक 2026 का समापन

भारत ने ग्लोबल एनर्जी सेक्टर में अपनी भूमिका को और मजबूत किया

नई दिल्ली, 31 जनवरी 2026। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इंडिया एनर्जी वीक (आईईडब्ल्यू) 2026 का समापन किया। उन्होंने कहा कि भारत ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में लगातार भू-राजनीतिक अस्थिरता से निपटने के लिए मजबूत तैयारी दिखाई है। इंटरनेशनल एनर्जी डायलॉग में केंद्र में बना रहेगा। यह कार्यक्रम 27 जनवरी से 30 जनवरी, 2026 तक गोवा में आयोजित किया गया।

समापन फायरसाइड चैट के दौरान बोलते हुए, श्री पुरी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की एनर्जी रणनीति विविधीकरण, सशक्तता और भविष्य के अनुकूल बदलावों पर आधारित है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, हमने लगातार भू-राजनीतिक झटकों का बहुत अच्छे से सामना किया है। सप्लाई के सोर्स के विविधीकरण और क्लीनर फ्यूल की ओर तेजी से बदलाव के जरिए हर चुनौती को एक अवसर में बदला गया है।

भारत के वैश्विक रुख से अवगत कराते हुए, श्री पुरी ने कहा कि आज देश तीसरा सबसे बड़ा एनर्जी कंज्यूमर, चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पेट्रोलियम उत्पादों के शीर्ष निर्यातकों में से एक है। श्री पुरी ने कहा, ग्लोबल अनिश्चितता के बीच भी, भारत एनर्जी की उपलब्धता, किफायती दाम और सततता सुनिश्चित करता रहेगा।

केंद्रीय मंत्री ने पारंपरिक ईंधनों में लगातार निवेश के साथ-साथ कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी), ग्रीन हाइड्रोजन और स्वदेशी क्लीन-एनर्जी टेक्नोलॉजी पर सरकार द्वारा जोर दिये जाने के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, पारंपरिक एनर्जी जरूरी रहेगी, लेकिन इथेनॉल ब्लेंडिंग से लेकर सीबीजी, हाइड्रोजन और बायोफ्यूल तक हम जो कदम उठा रहे हैं, वे हमें विश्वास दिलाते हैं कि ग्रीनर फ्यूल एक बड़ी भूमिका निभाएंगे।

वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले असर के बारे में चिंताओं को दूर करते हुए, हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत ने अपने नागरिकों को अस्थिरता से सफलतापूर्वक बचाया है। उन्होंने कहा, वैश्विक उथल-पुथल का असर कभी भी उपभोक्ता पर नहीं पड़ा।

आज भारत में एनर्जी की कीमतें दुनिया में सबसे कम हैं और संकट के समय भी बिना किसी रुकावट के आपूर्ति बनाए रखी गई है। तेल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा समय पर कार्रवाई के द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि एलपीजी सहित फ्यूल की कीमतें उपभोक्ताओं के लिए किफायती बनी रहें।