पेरिस, 5 अप्रैल 2026। माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है। ऐसे में समय रहते इसके प्रभावों को नियंत्रित करने और प्लास्टिक उपयोग में कमी लाने के लिए वैश्विक स्तर पर ठोस कदम उठाना बेहद जरूरी है।
वैश्विक स्तर पर तेजी से उभरते पर्यावरणीय संकट माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। चेंज नाऊ 2026 के तहत अलार्टा ग्लोबल रिसर्च सेंटर द्वारा आयोजित एक इंटरैक्टिव वर्कशॉप में इस अदृश्य लेकिन खतरनाक प्रदूषण के दुष्परिणामों पर विस्तार से चर्चा की गई।
चेंज नाऊ, जो सतत विकास के लिए दुनिया के प्रमुख मंचों में से एक माना जाता है, विज्ञान, उद्योग और पर्यावरण क्षेत्र के हजारों विशेषज्ञों को एक साथ लाकर वैश्विक समस्याओं के समाधान खोजने का प्रयास करता है। इस मंच पर आयोजित वर्कशॉप में माइक्रो और नैनोप्लास्टिक की बढ़ती मौजूदगी और उनके दूरगामी प्रभावों को लेकर चिंताजनक तथ्य सामने आए।
विशेषज्ञों ने बताया कि माइक्रोप्लास्टिक बेहद छोटे प्लास्टिक कण होते हैं, जो पानी, हवा और मिट्टी के माध्यम से हर जगह फैल चुके हैं। वहीं, नैनोप्लास्टिक इससे भी सूक्ष्म होते हैं और आसानी से मानव शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इनके दुष्प्रभावों में श्वसन तंत्र की समस्याएं, हार्मोनल असंतुलन और कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाना शामिल है।
वर्कशॉप में यह भी बताया गया कि नैनोप्लास्टिक में इलेक्ट्रोस्टैटिक चार्ज ग्रहण करने की क्षमता होती है, जिससे वे पर्यावरण में मौजूद विषैले तत्वों को अपनी ओर आकर्षित कर सकते हैं। यह गुण उन्हें और अधिक खतरनाक बना देता है, क्योंकि वे जहरीले पदार्थों को मानव शरीर तक पहुंचाने का माध्यम बन सकते हैं।
पर्यावरणीय दृष्टि से भी माइक्रोप्लास्टिक का प्रभाव गंभीर है। वैज्ञानिकों ने बताया कि ये कण वायुमंडल में बादल बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे वर्षा चक्र में बदलाव संभव है। इसके अलावा, महासागरों में इनकी मौजूदगी समुद्री तापमान और जैव विविधता पर नकारात्मक असर डाल रही है, जिससे समुद्री जीवन संकट में पड़ सकता है।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को नैनो प्लास्टिक: ए थ्रेट टू लाइफ नामक एक लोकप्रिय विज्ञान फिल्म भी दिखाई गई, जिसमें इस समस्या के विभिन्न पहलुओं को सरल और प्रभावी तरीके से समझाया गया है।
इससे पहले, सेंटर ने यूरोपीय संसद में नैनो प्लास्टिक : हिडेन कनेक्शन एंड इमर्जिंग रिस्क विषय पर एक सम्मेलन भी आयोजित किया था, जिसमें नीति निर्माण और शोध की दिशा पर चर्चा की गई थी।
पेरिस में आयोजित इस वर्कशॉप में करीब 80 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें वैज्ञानिक, पर्यावरण कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल थे। सभी ने इस मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने और ठोस समाधान खोजने की आवश्यकता पर जोर दिया।