रायगढ़, 15 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में वर्ष 2022 से मैट्रिमोनियल गैंग सक्रिय था। 4 सालों में इस गैंग ने मैट्रिमोनियल साइट पर दुल्हन की खोज कर रहे 7,693 को अपना शिकार बनाया। इसका मास्टर माइंड कपिल गर्ग है। रायगढ़ के एसएसपी शशि मोहन सिंह ने इस पूरे गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड समेत 26 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
यह गिरोह फर्जी मैट्रिमोनियल साइट, यूट्यूब चैनल और कॉल सेंटर के माध्यम से देशभर के लोगों को शादी के नाम पर झांसा देकर ठगी कर रहा था। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2022 से अब तक गिरोह ने 7,693 लोगों को अपना शिकार बनाया और उनसे कुल एक करोड़ 11 लाख 36 हजार रुपए की ठगी की।
मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है, जहां दरोगा पारा इलाके में संचालित निधि परिवहन सुविधा केंद्र की आड़ में इस पूरे नेटवर्क को चलाया जा रहा था। सूचना मिलने पर पुलिस और साइबर टीम ने सोमवार दोपहर संयुक्त कार्रवाई करते हुए केंद्र पर छापा मारा।
छापेमारी के दौरान मौके से कई युवतियां काम करती हुई मिलीं, जो कॉल सेंटर के जरिए लोगों से संपर्क कर रही थीं। जांच में खुलासा हुआ कि बाहर से यह केंद्र लाइसेंस और दस्तावेज बनाने का वैध कार्य करता हुआ दिखाई देता था, जबकि अंदर अलग-अलग कमरों में फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे और वीडियो एडिटिंग के जरिए नकली प्रोफाइल बनाए जाते थे।
पुलिस ने बताया कि गिरोह फर्जी जीमेल आईडी, मोबाइल नंबर और यूट्यूब चैनलों का इस्तेमाल कर लोगों को संपर्क करता था। इसके बाद रजिस्ट्रेशन फीस, मीटिंग फीस सहित अन्य बहानों से यूपीआई के जरिए रकम वसूली जाती थी, लेकिन पीड़ितों को न तो कोई सही जानकारी दी जाती थी और न ही विवाह के लिए कोई वास्तविक संपर्क उपलब्ध कराया जाता था।
जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी कपिल गर्ग पहले लोक सेवा केंद्र के माध्यम से आरटीओ से संबंधित कार्य करता था। आईडी निरस्त होने के बाद उसने अपने सहयोगी हिमांशु मेहर सहित अन्य लोगों के साथ मिलकर इस अवैध नेटवर्क की शुरुआत की।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 55 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप, दो प्रिंटर तथा तीन बैंक खाते जब्त किए हैं। साथ ही लैपटॉप से फोटोशॉप के माध्यम से दस्तावेजों में छेड़छाड़ और विभिन्न सरकारी विभागों की फर्जी सील एवं मुहर बनाने के प्रमाण भी मिले हैं।
इस संबंध में आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2), 336(3), 336(4), 338, 340(2), 61(2), 112(2), 316(2), 318(4) तथा आईटी एक्ट की धारा 66C और 66D के तहत मामला दर्ज किया गया है।
सभी आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
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