भारत और जापान ने वैश्विक साझेदारी का नया अध्याय शुरू किया है। 1 जुलाई 2026 की शाम भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर दिल्ली पहुंची जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने इस दिशा में बड़ी पहल की। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत और जापान ने विशेष रणनीतिक तथा वैश्विक साझेदारी के नये अध्याय की शुरूआत करते हुए आर्थिक सुरक्षा,रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता , प्रौद्योगिकी, ऊर्जा सुरक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग बढाने के अनेक समझौतों पर गुरूवार 2 जुलाई 2026 को हस्ताक्षर किये तथा कई महत्वपूर्ण पहलों की घोषणा की।
श्री मोदी ने भारत की तीन दिन की यात्रा पर आई जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के साथ यहां भारत जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद संयुक्त प्रेस वक्तव्य में कहा कि वैश्विक उथल-पुथल के आज के माहौल में, आपसी विश्वास हमारी सबसे बड़ी रणनीतिक पूंजी है।
प्रधानमंत्री ने स्वतंत्र,समृद्ध और नियम आधारित हिन्द प्रशांत क्षेत्र को भारत और जापान की साझा प्राथमिकता बताते हुए कहा कि इन समझौतों और पहल से क्षेत्र में शांति , स्थिरता और प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा।
उन्होंने कहा कि जापान ने पिछले कई दशकों में ऑटोमोटिव से लेकर इलेक्ट्रानिक्स तक, भारत की विकास यात्रा का अहम हिस्सेदार बनकर दोस्ती और विश्वास की एक अमूल्य पूंजी बनाई है। अब इसे आगे बढाते हुए दोनों देशों में सहमति बनी है कि जापान अगले दस वर्षों में भारत में 100 खरब येन का निवेश करेगा और भारत में सक्रिय जापानी कंपनियों की संख्या दोगुना हो जायेगी। दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत बनाने के लिए एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया है और समझौते भी किये हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ताकाइची और उनका विश्वास है कि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में साझेदारी हमारे सहयोग का सबसे मजबूत स्तंभ बनेगी। इसी दृष्टिकोण को साकार करने के लिए, आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में हमने एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय ए आई इकोसिस्टम के कई प्रमुख संस्थानों ने भी आज अपने जापानी साझीदारों के साथ समझौते किए हैं। जापान की सटीक प्रौद्योगिकी और भारत की सॉफ्टवेयर क्षमता का संगम वैश्विक एआई विकास को नई गति और शक्ति देगा।
प्रधानमंत्री ने कहा की रक्षा के क्षेत्र में आज हमने भारत और जापान की पहली सह विकास परियोजना पर हस्ताक्षर किए हैं। नौसैनिक रेड़ियो एंटीना की यह परियोजना हमारी रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदारी में एक नया अध्याय शुरू करेगी। उन्होंने कहा अब हम ऐसी रक्षा प्रौद्योगिक साथ मिलकर विकसित करेंगे, जो क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा और नियम आधारित व्यवस्था को मजबूत करेंगी।
श्री मोदी ने कहा कि भारत-जापान निवेश साझेदारी निरंतर आगे बढ रही है। पिछले एक साल में 100 से ज्यादा नए व्यापारिक समझौते हुए हैं, भारत में 10 अरब डॉलर से ज्यादा जापानी निवेश आया है। आज वित्तीय सेवा एजेंसियों के बीच समझौते से पूंजी तथा निवेश प्रवाह और सुगम होगा। उन्होंने कहा, हमारा लक्ष्य स्पष्ट है- अगले 10 वर्षों में जापान से भारत में 100 येन का निवेश, और भारत में जापानी कंपनियों की संख्या दोगुनी करना।
उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चतता के इस दौर में दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा के लिए संयुक्त रोड मैप तैयार किया है। उन्होंने कहा, इसके माध्यम से हम सेमीकंडक्टर क्वांटम और उन्नत सामग्रियों जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेंगे।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी हमने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। उन्होंने कहा, भारत जापान बायोगैस पहल के माध्यम से हम भारत में एक हजार बायोगैस और कार्बनिक फर्टिलाइजर संयंत्र लगाएंगे। इससे भारत की गोवर्धन पहल और मजबूत होगी गांवों में समृद्धि तथा ग्रामीण आजीविका को नई शक्ति मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हमने ‘भारत-जापान नेक्स्ट जनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप फ्रैम्वर्क’ भी तैयार किया है। इससे अब हम ऑटोमोटिव सेक्टर में हमारी सफलता को, जहाजरानी,वैमानिकी और लॉजिस्टिक जैसे क्षेत्रों में भी दोहराएंगे। उन्होंने कहा कि फार्मा, मेडिकल डिवाइस और बायो-टेक में आज किये गये समझौतों से हम वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में भी योगदान देंगे।
श्री मोदी ने कहा कि भारत और जापान की अर्थव्यवस्था एक दूसरे की पूरक है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक मूल्यों से लेकर आधुनिक प्रौद्योगिकी तक, हमारी सोच और अप्रोच में भी समानता है और सबसे बढ़कर, हमारे संबंधों की नींव अटूट आपसी विश्वास पर टिकी हैं।
