नई दिल्ली, 22 जून 2025। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की युवा पहलवान कृतिका राजपूत ने कुश्ती के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए हिमाचल केसरी 2025 का खिताब अपने नाम किया है। इस शानदार उपलब्धि के साथ कृतिका ने न केवल हिमाचल, बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया है। हिमाचल केसरी, जो राज्य में कुश्ती का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है, कृतिका की प्रतिभा, मेहनत और अदम्य साहस का प्रतीक है। उनकी यह जीत ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली लड़कियों के लिए एक मिसाल बन गई है, जो यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियों में भी सपनों को हकीकत में बदला जा सकता है।
कृतिका राजपूत का कुश्ती के प्रति जुनून बचपन से ही स्पष्ट था। छोटी उम्र में ही उन्होंने स्थानीय अखाड़ों में प्रशिक्षण शुरू किया। ग्रामीण क्षेत्र की सीमित सुविधाओं और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद, कृतिका ने अपने लक्ष्य से कभी नजर नहीं हटाई। उनके पिता, जो एक किसान हैं, और उनके कोच ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें हर कदम पर प्रोत्साहित किया।
कृतिका ने अपनी लगन से न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी पहचान बनाई। राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण और रजत पदक जीतने के बाद, उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हिमाचल केसरी 2025 की प्रतियोगिता में कृतिका ने अपने तकनीकी कौशल और रणनीति से कई अनुभवी पहलवानों को पछाड़ा। फाइनल मुकाबले में उनकी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ शानदार जीत ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
यह उपलब्धि कृतिका के लिए सिर्फ एक व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि हिमाचल की युवा पीढ़ी, विशेष रूप से लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया है कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। कृतिका की कहानी उन तमाम लड़कियों के लिए एक प्रेरणा है, जो सामाजिक बंधनों या संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को दबा देती हैं। कृतिका ने साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती।
कृतिका का अगला लक्ष्य अब और भी बड़ा है। वे ओलंपिक जैसे वैश्विक मंचों पर भारत के लिए पदक जीतने का सपना देख रही हैं। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वे कठिन प्रशिक्षण में जुटी हैं। उनके कोच का कहना है कि कृतिका की तकनीक और मानसिक दृढ़ता उन्हें एक विश्वस्तरीय पहलवान बनाती है। कृतिका की इस उपलब्धि ने हिमाचल में महिला खेलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं मिलें, तो वे भी कृतिका की तरह देश का नाम रोशन कर सकती हैं।
कृतिका की इस जीत पर स्थानीय प्रशासन, समुदाय और खेल प्रेमियों ने उनकी जमकर सराहना की है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने उन्हें बधाई देते हुए कहा, कृतिका हमारी बेटी है, जिसने पूरे राज्य को गौरवान्वित किया है। उनकी सफलता युवाओं के लिए एक मिसाल है। सोलन में उनके गांव में उत्सव का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि कृतिका की जीत ने पूरे गांव का सिर ऊंचा कर दिया है।
कृतिका राजपूत का यह सफर हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक है, जो अपने सपनों को साकार करना चाहता है। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि कठिनाइयां बाधा नहीं, बल्कि अवसर हो सकती हैं। हिमाचल की इस बेटी ने न केवल कुश्ती के दंगल में जीत हासिल की, बल्कि लाखों दिलों को भी जीत लिया। उनकी यह उपलब्धि हिमाचल की बेटियों को नई ऊंचाइयों को छूने के लिए प्रोत्साहित करेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मशाल बनकर चमकेगी।
















