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शीतल देवी, दुनिया की पहली बिना हाथ वाली महिला तीरंदाज

शीतल देवी, दुनिया की पहली बिना हाथ वाली महिला तीरंदाज

नई दिल्ली, 22 जून 2025। शीतल देवी ने केवल भारत की उभरती हुई पैरा-तीरंदाज हैं, बल्कि इन्होंने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति और असाधारण प्रतिभा से विश्व मंच पर देश का गौरव बढ़ाया है। 10 जनवरी 2007 को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के लोइधर गांव में जन्मी शीतल फोकोमेलिया, एक दुर्लभ जन्मजात स्थिति, के साथ पैदा हुईं, जिसके कारण उनके दोनों हाथ नहीं हैं। इसके बावजूद, उन्होंने अपने पैरों और मुंह के सहारे तीरंदाजी में महारत हासिल की, और दुनिया की पहली बिना हाथ वाली सक्रिय महिला तीरंदाज बनकर इतिहास रचा।

17 वर्ष की उम्र में शीतल ने पेरिस पैरालंपिक 2024 में राकेश कुमार के साथ मिश्रित कंपाउंड तीरंदाजी में कांस्य पदक जीता, जिससे वह भारत की सबसे कम उम्र की पैरालंपिक पदक विजेता बनीं। उन्होंने व्यक्तिगत कंपाउंड ओपन रैंकिंग में 703 अंकों के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाया, हालांकि यह बाद में टूट गया। मिश्रित टीम में उनके और राकेश के 1399 अंकों ने भी विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया।

एशियन पैरा गेम्स 2023 में शीतल ने दो स्वर्ण पदक (महिला व्यक्तिगत और मिश्रित टीम) और एक रजत (महिला टीम) जीता, जिससे वह एक सत्र में दो स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप 2023 में रजत पदक जीतकर उन्होंने पेरिस पैरालंपिक 2024 के लिए कोटा हासिल किया।

शीतल की कहानी प्रेरणादायक है। उनकी मेहनत, समर्पण और साहस ने साबित किया कि शारीरिक सीमाएं सपनों को रोक नहीं सकतीं। वह न केवल भारत की गर्व का प्रतीक हैं, बल्कि युवाओं के लिए एक प्रेरणा भी हैं, जो असंभव को संभव बनाने की हिम्मत देती हैं।