रायपुर, 9 अगस्त 2025। छत्तीसगढ़ में विश्व आदिवासी दिवस पर शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। राज्य के गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में बैगा जनजाति जो राष्ट्रपति के द्वारा गोद ली गई जनजाति है, इस समुदाय के दो लोगों की डायरिया की चपेट में आने से मौत हो गयी।
राष्ट्रपति के द्वारा गोद लिए गये इन दत्तक परिवारों तक अभी तक शुद्ध पेयजल तक सरकार उपलब्ध नहीं करा पायी है। गांव के लोग कुएं के पानी का उपयोग पेयजल के लिए करते हैं। वर्षा ऋतु में पानी प्रदूषित होने से अक्सर ये लोग बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।
मामला साल्हेघोरी और छिंदपानी गांव का है। इन गांवो में पिछले करीब पांच दिनों से डायरिया फैला हुआ है। वर्तमान में 20 से अधिक पीडि़त अस्पताल में भर्ती हैं। छिंदपानी गांव के सरपंच धनसिंह बैगा ने इसकी पुष्टि की है। सरपंच ने यह भी बताया कि गांव में अभी नल जल योजना नहीं पहुंच सकी है। साल्हेघोरी गांव में 42 घर बैगा जनजाति के है। यह सभी राष्ट्रपति के द्वारा गोद लिए गये हैं।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मृतकों के परिवार को 25,000 रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया है। गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम कैंप कर रही है और शिविर लगाकर पीडि़तों का उपचार कर रही है।













