लखनऊ, 18 अगस्त 2025। दिल को छू लेने वाली एक कहानी ने आज फिर मानवता का परचम लहराया। सोशल एक्टिविस्ट ज्योति राजपूत और बृजेंद्र बहादुर मौर्य ने एक बार फिर अपने नेक कार्य से समाज में आशा की किरण जगा दी। बहराइच के मड़िहाना चौकी, सरौतापुरवा के 80 वर्षीय मिल्कीराम, जो अपने परिवार से बिछड़ गए थे, आखिरकार अपनों के आलिंगन में लौट आए।
7 अगस्त 2025 को मिल्कीराम घर से निकले और भटकते हुए लखनऊ पहुंच गए। स्थानीय पुलिस ने उनकी देखभाल करते हुए उन्हें सरोजिनी नगर के वृद्धाश्रम में आश्रय दिया। लेकिन नियति को शायद कुछ और मंजूर था। जब यह खबर ज्योति और बृजेंद्र तक पहुंची, तो उनके दिलों में करुणा जागी। दोनों ने बिना देर किए सोशल मीडिया का सहारा लिया। बृजेंद्र ने ट्विटर पर जिले के अधिकारियों को सूचित किया और मिल्कीराम के परिजनों की तलाश शुरू की।
दिन-रात की मेहनत रंग लाई। उनके अथक प्रयासों से मिल्कीराम के दामाद सुशील और बेटी मीरा देवी का पता चला। जब वे वृद्धाश्रम पहुंचे, तो मिल्कीराम की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। कागजी औपचारिकताएं पूरी कर परिवार उन्हें घर ले गया। यह पल न सिर्फ उनके लिए, बल्कि ज्योति और बृजेंद्र के लिए भी भावुक था।
इस कार्य में पुलिस और सोशल मीडिया का सहयोग सराहनीय रहा। ज्योति और बृजेंद्र, जो पहले भी कई बिछड़ों को अपनों से मिला चुके हैं, आज फिर समाज के लिए प्रेरणा बने। उनके इस जज्बे को सलाम है, जो बताता है कि मानवता अभी जिंदा है।