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राष्ट्रीय स्तर पर बने स्वतंत्र बुनकर कल्याण बोर्ड, अधिवेशन में 13 प्रस्ताव पारित

राष्ट्रीय स्तर पर बने स्वतंत्र बुनकर कल्याण बोर्ड, अधिवेशन में 13 प्रस्ताव पारित

रायपुर, 25 अगस्त 2025। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सहकार भारती का राष्ट्रीय बुनकर अधिवेशन सम्प्पन हो गया। 23 और 24 अगस्त को आयोजित इस अधिवेशन में राष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र बुनकर कल्याण बोर्ड के गठन की मांग उठी। दो दिवसीय अधिवेशन में देशभर से आये बुनकरों से चर्चा और मंथन उपरांत उनकी समस्याओं के निराकरण हेतु 13 प्रस्ताव पारित हुए। इस प्रस्ताव को भारत सरकार को भेजा जायेगा।

सहकार भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय पाचपोर ने प्रस्तावों के संबंध में बताया कि बुनकरों के कल्याण हेतु राष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र बुनकर कल्याण बोर्ड का गठन किया जाये जहां सरकारी योजनाओं की निगरानी और शिकायतों का समाधान हो। हाथकरघा क्लस्टर और कॉमन फैसलेटी सेंटर का गठन, हाथकरघा वस्त्रो के निर्माण में लगने वाले जीएसटी को माफ करते हुए जीएसटी मुक्त किया जाये। राष्ट्रीय हाथकरघा नीति बनाने की मांग, बुनकरों के लिए पर्यटन सहित 13 प्रस्ताव पारित किया गया।

अधिवेशन में देशभर से आये बुनकर प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याओं और सरकारी योजनाओं को लेकर चर्चा की। अधिवेशन का उद्देश्य हथकरघा और हस्तशिल्प में बढ़ते मशीनों के उपयोग, घटते बुनकरों की संख्या, सरकारी अनुदान में कमी सहित अनेक विषयों पर चर्चाएं हुई। अधिवेशन में केरल, महाराष्ट्र, बिहार मध्यप्रदेश, आसाम, पक्षिम बंगाल, सहित कुल 17 राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए। अधिवेशन के दूसरे दिन बुनकरों ने 13 मांगों का प्रस्ताव पारित किया जिसे भारत सरकार को भेजा जायेगा। प्रस्ताव को बुनकर प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक अनंत कुमार मिश्रा ने रखा जिसे देशभर से आये बुनकर प्रतिनिधियों ने दोनों हाथ उठाकर समर्थन दिया और सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित हुए।

नक्सलगढ़ की छवि अब सुधरेगी

छत्तीसगढ़ सरकार के वरिष्ठ मंत्री रामविचार नेताम ने छत्तीसगढ़ शांति का टापू है, यह बाबा गुरुघासीदास, बिरसामुंडा की धरती है। साल 2000 में छत्तीसगढ़ का उदय हुआ तो प्रदेश की बीजेपी सरकार ने इसे विकसित राज्य बनाने की कोशिश की, जिसका परिणाम है समकालीन राज्यों में छत्तीसगढ़ तेजी से विकसित हो रहा है। छत्तीसगढ़ को दूर से देखने वाले नक्सलगढ़ समझते है, पर यह शांति का टापू है। जल्द ही नक्सल समस्या का संधान भी हो जायेगा।

छत्तीसगढ़ में बुनकरों की स्थिति बेहद अच्छी नहीं है, आज भी हमारे द्वारा उपयोग किये जाने वाला राजकीय गमछा मशीनों से बना होता है, जबकि उसे हाथकरघा से बना होना चाहिए। हमें अच्छी क्वालिटी के उत्पाद तैयार करने जरूरत है।

मै स्वयं बुनकरों के गांव से आता हूं : राज्यपाल

समापन सत्र में राज्यपाल रमेन डेका ने आयोजन के लिए सहकार भारती और बुनकर प्रकोष्ठ के अधिवेशन में पधारें बुनकरों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसा आयोजन निश्चित रूप से बुनकरों के जीवन में आमूल चूल परिवर्तन लाने वाला है। मेरे गांव में बुनकरों की संख्या अधिक है, जिसके चलते उसे बुनकरों का गांव कहा जाता है। भारत एक बड़े बाजार में रूप में उभरा है ऐसे में यहां बुनकर समितियों और पावरलूम में व्यापक संभावनाएं है। छत्तीसगढ़ का कोसा देशभर में प्रसिद्ध है उसे और बढ़ाने की जरुरत है, उन्होंने अमूल और लिज्जत पापड़ का उदाहरण देते हुए उनके जैसे काम करने की नसीहत दी। आसाम से आये बुनकर प्रतिनिधियों का राजभवन में अतिथि सत्कार किया गया।

राष्ट्रीय बुनकर प्रकोष्ठ का पुनर्गठन

सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. उदय जोशी ने राष्ट्रीय बुनकर प्रकोष्ठ का पुनर्गठन किया, जिसमें अनंत कुमार मिश्र को संयोजक बनाते हुए आसाम गुजरात महाराष्ट्र, उड़ीसा छत्तीसगढ़ के बुनकरों को सदस्य बनाने की घोषणा की। कार्यक्रम में सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. उदय जोशी, राष्ट्रीय महामंत्री दीपक चौरसिया, राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय पाचपोर, आरबीआई व नाबार्ड के डायरेक्टर सतीश मराठे, राष्ट्रीय महिला प्रमुख रेवती शेंदुर्निकर, छत्तीसगढ़ सहकार भारती के संगठन महामंत्री कनीराम जी, अधिवेशन संयोजक सुरेंद्र पाटनी, सहसंयोजक पुरुषोत्तम देवांगन, अधिवेशन व्यवस्था प्रमुख अजय अग्रवाल, प्रदेश कार्यालय मंत्री सहित कार्यक्रम से जुड़े सभी कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।