रायपुर, 25 अगस्त 2025। कलिंगा विश्वविद्यालय में ‘आर्द्रभूमि बचाओ अभियान’ के तहत दो दिवसीय गोष्ठी और कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पद्मश्री उमाशंकर पांडेय ने किया। कलिंगा विश्वविद्यालय और सेंटर फॉर एन्वायरमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीईईडी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जल संरक्षण और वेटलैंड संरक्षण पर गहन चर्चा हुई।
पद्मश्री उमाशंकर पांडेय ने प्राचीन भारतीय संस्कृति में जल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि प्राचीन जलाशय आज भी कार्यरत हैं। उन्होंने भोजन और पानी की बर्बादी पर चिंता जताते हुए माइक्रोचिप जैसे औद्योगिक कार्यों में जल की भारी खपत का उल्लेख किया। उन्होंने वर्षा जल संचयन और जल के प्रबंधित उपयोग पर जोर देते हुए चेतावनी दी कि यदि समय रहते नहीं चेते, तो भविष्य में जल संकट गहरा सकता है।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर श्रीधर ने कहा कि जल संकट से निपटने के लिए हमें यक्ष प्रश्नों के उत्तर की तरह सक्रियता से जल संरक्षण की दिशा में कदम उठाने होंगे। आईएफएस अरुण कुमार पांडेय ने जल को परमेश्वर बताते हुए कहा कि वृक्ष और नदियां परोपकार की भावना सिखाती हैं। उन्होंने धर्म शास्त्रों का हवाला देते हुए एक वृक्ष को दस पुत्रों से अधिक महत्वपूर्ण बताया। रायपुर के पर्यावरणविद प्रभात मिश्रा ने रायपुर की नदियों और तालाबों के संरक्षण पर बल दिया।
डॉ. अशोक कुमार चतुर्वेदी हरबंस ने जल के लिए विश्वविद्यालय और पाठशालाएं स्थापित करने की आवश्यकता जताई। सीईईडी के स्टेट हेड तुषार शर्मा ने सभी का स्वागत किया।














