रायपुर, 4 अक्टूबर 2025। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक, लेखक और चिंतक राम माधव ने कहा कि 21वीं सदी में दुनिया तेजी से बदल रही है और भारत को इस नए युग में वैश्विक नेतृत्व के लिए तैयार होना होगा। वे साहित्य अकादमी, छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद और छत्तीसगढ़ यंग थिंकर्स फाउंडेशन द्वारा आयोजित उनकी पुस्तक ‘द न्यू वर्ल्ड: 21 सेंचुरी ग्लोबल ऑर्डर एंड इंडिया’ पर आधारित विशेष व्याख्यान में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य अपूर्व मिश्र सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। राम माधव ने कहा कि मानव सभ्यता चौथी औद्योगिक क्रांति में प्रवेश कर चुकी है, जिसका आधार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और तकनीकी नवाचार है। उन्होंने उदाहरण दिया कि 1980 में भारत और चीन की जीडीपी लगभग समान थी, लेकिन चीन ने अपनी आर्थिक नीतियों और वैश्विक व्यापार में प्रगति कर भारत से काफी आगे निकल गया।
भारत को अब तकनीकी नवाचार, आर्थिक सशक्तिकरण और दीर्घकालिक रणनीति के साथ वैश्विक परिदृश्य में अपनी स्थिति मजबूत करनी होगी। उन्होंने कहा कि युद्ध के बाद उपनिवेशवाद का अंत हुआ और भारत ने 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त की। आज फिर वैश्विक व्यवस्था बदल रही है, और भारत को इस बदलाव के अनुरूप ढलना होगा।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए राम माधव ने कहा कि हमें यह समझना होगा कि 2047 में भारत और विश्व कैसा होगा। इसके लिए दीर्घकालिक रणनीति और स्पष्ट दृष्टिकोण आवश्यक है।
उन्होंने जोर दिया कि भारत को अनुसंधान और विकास (R&D) पर ध्यान देना होगा, जैसा कि विकसित देश करते हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक संस्थाएं जैसे संयुक्त राष्ट्र आज कम प्रभावी हो रही हैं, और अगले दस वर्षों में वैश्विक व्यवस्था और चुनौतियों से निपटने के लिए भारत को अभी से तैयार रहना होगा।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राम माधव की पुस्तक एक नई विचार यात्रा की शुरुआत करती है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पिछले 25 वर्षों में ऐसी अधोसंरचना विकसित हुई है, जो भविष्य में भारत की वैश्विक भूमिका में योगदान दे सकती है। अकादमिक संस्थाओं, प्रशासन और शोधकर्ताओं को इस दिशा में जिम्मेदारी निभानी होगी।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नक्सल समस्या के उन्मूलन के बाद बस्तर में उपजी परिस्थितियों पर काम करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह मानना गलत है कि सब कुछ अपने आप ठीक हो जाएगा। अगले दस वर्षों में वैश्विक और स्थानीय परिस्थितियां बदलेंगी, और इसके लिए अभी से रणनीति बनानी होगी। उन्होंने गांधी जी के एक पत्र का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि हमें अपने कर्तव्यों पर ध्यान देना चाहिए, न कि केवल अधिकारों पर।
शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद संविधान में शुरू में कर्तव्यों का उल्लेख नहीं था, जिसे बाद में जोड़ा गया। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और तकनीकी विकास पर जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य तभी संभव है, जब सभी मिलकर परिश्रम करें। शर्मा ने कहा कि समस्याएं और चुनौतियां हमेशा रहेंगी, लेकिन हमें आलस्य त्यागकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री के 18 घंटे काम करने के समर्पण का उदाहरण देते हुए कहा कि हमें भी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।
अनुसंधान और विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि भारत वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाए। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य अपूर्व मिश्र ने राम माधव की पुस्तक का विस्तृत परिचय देते हुए इसके वैश्विक और भारतीय संदर्भों को रेखांकित किया। कार्यक्रम का संचालन छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने किया। यंग थिंकर्स फाउंडेशन के उज्जवल दीपक मंच पर उपस्थित थे। कार्यक्रम में प्रदेशभर से बुद्धिजीवी, विचारक और शोधकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए।














