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गूगल डूडल ने मनाया इडली का जश्न | दक्षिण भारत का प्रसिद्ध व्यंजन

गूगल डूडल ने मनाया इडली का जश्न: दक्षिण भारत का प्रसिद्ध व्यंजन जिसने जीता दुनिया का दिल

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2025। गूगल ने आज अपने डूडल के माध्यम से दक्षिण भारत के प्रसिद्ध व्यंजन इडली (Idli) को समर्पित किया है। यह साधारण दिखने वाला, लेकिन पोषक तत्वों से भरपूर पारंपरिक व्यंजन भारत के साथ-साथ दुनिया भर में लोकप्रिय हो चुका है। आज का डूडल इडली की सांस्कृतिक विरासत, स्वाद और भारतीय खानपान में उसके महत्व का जश्न मना रहा है।

इडली को चावल और उड़द दाल के खमीरीकृत घोल से तैयार किया जाता है। इसे भाप में पकाया जाता है, जिससे यह बेहद हल्की, फूली और मुलायम बनती है। आमतौर पर इसे नारियल की चटनी, सांभर या टमाटर की चटनी के साथ परोसा जाता है। दक्षिण भारत के हर घर में यह रोजमर्रा का नाश्ता माना जाता है, वहीं उत्तर भारत और अन्य राज्यों में भी यह अब आमतौर पर रेस्तरां और घरों की रसोई में जगह बना चुकी है।

गूगल डूडल की थीम

Google Doodle Celebrates Idli | South India’s Famous Dish | ASR24 News

आज का गूगल डूडल एक खूबसूरत एनिमेशन के रूप में इडली बनाने की प्रक्रिया को दिखाता है। इसमें चावल और दाल को भिगोकर पीसने, खमीर उठने और भाप में पकने तक की पूरी पारंपरिक विधि को आकर्षक अंदाज़ में दर्शाया गया है। यह डूडल न सिर्फ इडली के स्वाद का, बल्कि भारतीय खानपान की विविधता और परंपरा का भी उत्सव है।

इडली का इतिहास और उत्पत्ति

इतिहासकारों के अनुसार, इडली का उल्लेख 9वीं शताब्दी के कन्नड़ साहित्य में मिलता है। माना जाता है कि यह व्यंजन कर्नाटक और तमिलनाडु से विकसित हुआ और धीरे-धीरे पूरे दक्षिण भारत में फैल गया। कुछ शोध यह भी बताते हैं कि इडली की प्रेरणा इंडोनेशिया के ‘किदली’ या ‘इडलिया’ जैसे फर्मेंटेड व्यंजनों से मिली हो सकती है, जिन्हें भारतीय व्यापारियों ने अपने देश लाकर स्थानीय सामग्री से नया रूप दिया।

समय के साथ इडली ने कई रूप धारण किए हैं जैसे रवा इडली, कांचिपुरम इडली, मिनी इडली, मेलागु इडली और मसाला इडली। आज यह न केवल घरों में बल्कि अंतरराष्ट्रीय होटलों के मेन्यू में भी अपनी जगह बनाए हुए है।

स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतरीन

इडली को ‘हेल्दी फूड’ के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि इसमें तेल या घी का प्रयोग नहीं होता। यह लो कैलोरी, हाई प्रोटीन और ग्लूटन-फ्री भोजन है। डॉक्टरों के अनुसार, यह आसानी से पचने वाला व्यंजन है जो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए उपयुक्त है। इडली को स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहद फायदेमंद माना जाता है। चूंकि इसे भाप में पकाया जाता है, इसलिए इसमें पोषक तत्व बने रहते हैं और यह पाचन के लिए हल्का होता है। डॉक्टर इसे हर उम्र के लोगों के लिए उपयुक्त मानते हैं।

भारतीय संस्कृति में इडली का महत्व

दक्षिण भारत में इडली केवल नाश्ता नहीं बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव है। सुबह की शुरुआत अक्सर ‘इडली-सांभर’ के साथ होती है और कई घरों में यह अतिथि सत्कार का भी प्रतीक माना जाता है। शादी-ब्याह और त्यौहारों के अवसर पर भी इडली विशेष रूप से बनाई जाती है।

डिजिटल युग में भारतीय व्यंजनों की पहचान

गूगल द्वारा इडली को डूडल के रूप में सम्मानित करना भारतीय व्यंजनों के वैश्विक महत्व को दर्शाता है। यह बताता है कि कैसे भारत की पारंपरिक रसोई, जो स्थानीय स्वाद और सामग्री से समृद्ध है, अब विश्व पटल पर भी सम्मान पा रही है।

गूगल के इस कदम से न केवल इडली प्रेमियों में उत्साह है, बल्कि यह भारत की पाक परंपरा की पहचान को भी और मजबूत करता है। आज जब फास्ट फूड संस्कृति तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में गूगल का यह डूडल लोगों को पारंपरिक और पौष्टिक भारतीय भोजन की ओर लौटने की प्रेरणा भी देता है।

गूगल का आज का इडली डूडल केवल एक व्यंजन को समर्पित नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, परंपरा और स्वाद की विविधता को सलाम करने का प्रतीक है। यह संदेश देता है कि चाहे तकनीक कितनी भी आगे बढ़ जाए, भोजन के जरिए जुड़ी भारतीयता हमेशा जीवंत रहेगी।