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फिल्म गैंग्स आॅफ रायपुर युवाओं को नशे से दूर रहने की देगी सीख

फिल्म गैंग्स आफ रायपुर युवाओं को नशे से दूर रहने की देगी सीख

रायपुर, 14 अक्टूबर 2025। समाज में नशे की लत तेजी से फैल रही है, जो न केवल व्यक्तियों की शारीरिक व मानसिक सेहत को नष्ट कर रही है, बल्कि पूरे परिवारों की खुशियां छीन रही है। इस कड़वी सच्चाई को उजागर करने वाली छत्तीसगढ़ी-हिंदी फिल्म गैंग्स आफ रायपुर का जागरूकता आधारित गीत करते हैं जो नशा का विमोचन मंगलवार 14 अक्टूबर को रायपुर के विमतारा हॉल, शांति नगर, इंद्रावती कॉलोनी में भव्य रूप से किया गया।

दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक चले इस कार्यक्रम ने नशे के विनाशकारी प्रभावों पर गहन चर्चा को बढ़ावा दिया, साथ ही युवाओं और परिवारों को नशामुक्ति की प्रेरणा प्रदान की। फिल्म गैंग्स आॅफ रायपुर नशे की आगोश में फंसते युवाओं की मार्मिक कहानी बयां करती है। यह उन अनगिनत घरों की चीख है, जहां नशा हंसी-खुशी के पलों को चुपचाप लील जाता है।

फिल्म के क्रिएटिव डायरेक्टर-प्रोड्यूसर साजिद खान, डायरेक्टर-को-प्रोड्यूसर शिव कुमार और को-प्रोड्यूसर दीपेश कुकरेजा ने इसे एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में तैयार किया है। साजिद खान ने विमोचन समारोह में कहा, नशा आज केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक सामाजिक संकट बन चुका है। हर दिन सैकड़ों जिंदगियां इस जहर के कारण बर्बाद हो रही हैं। हमारी फिल्म और इसका गीत करते हैं जो नशा युवाओं को सोचने पर मजबूर करेगा कि नशा किसी भी रूप में समाधान नहीं, बल्कि विनाश की शुरुआत है।

गीत करते हैं जो नशा फिल्म का हृदय है, जो नशे के खतरों को भावुक और प्रभावी ढंग से चित्रित करता है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे नशा व्यक्ति की सोच को विकृत करता है, आत्मसम्मान को कुचल देता है और पारिवारिक संबंधों को तोड़ फोड़ देता है। लेकिन फिल्म दुख और बर्बादी पर थम नहीं जाती। यह उम्मीद की किरण भी जगाती है। इसका मूल संदेश स्पष्ट है— जिंदगी दोबारा भी संभाली जा सकती है, अगर इरादा मजबूत हो।

शिव कुमार ने बताया कि फिल्म छत्तीसगढ़ की वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है, जहां युवा अपराध की दुनिया में धकेल दिए जाते हैं। नशे के कारण बने गैंग्स और उनके दुष्परिणामों को फिल्म ने बिना किसी लाग-लपेट के उजागर किया है। यह जागरूकता अभियान युवा प्रतिभाओं की एक समर्पित टीम द्वारा तैयार किया गया है।

अभिनेता शील, अभिषेक और पलाश जैसी उभरती छत्तीसगढ़ी सिनेमा की नई पीढ़ी इसमें मुख्य भूमिकाओं में नजर आएगी। टीम का कहना है कि यह फिल्म किसी व्यावसायिक प्रचार या लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से बनाई गई है। दीपेश कुकरेजा ने कहा, हमने एफपीवी ड्रोन कैमरों का उपयोग कर रायपुर और कांकेर के ग्रामीण इलाकों की खूबसूरती को कैद किया है, ताकि दर्शक नशे के अंधेरे के बीच विकास की रोशनी भी देख सकें।

मीर अली मीर ने दिया प्रेरक संदेश

विमोचन समारोह में छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि मीर अली मीर की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से राज्य की वर्तमान परिस्थितियों खासकर नशे और अपराध के बढ़ते ग्राफ का मार्मिक व्याख्यान किया। मीर अली मीर ने कहा, नशा वह चोर है जो चुपचाप घर में घुस आता है और सब कुछ लूट ले जाता है। कविता और फिल्म जैसे माध्यम ही समाज को जागृत कर सकते हैं। उनके काव्य पाठ ने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

छत्तीसगढ़ पुलिस के अभियान को फिल्म में मिला स्थान

कार्यक्रम में विभिन्न समाजिक संगठनों, पुलिस अधिकारियों, शिक्षाविदों और स्थानीय निवासियों की भारी भीड़ उमड़ी। छत्तीसगढ़ पुलिस के मुक्ति अभियान को फिल्म में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है, जो नशामुक्ति के सरकारी प्रयासों को मजबूती प्रदान करता है। फिल्म का उद्देश्य बेहद स्पष्ट है युवाओं को नशे के खतरों से आगाह करना, परिवारों को प्रेरित करना कि नशा छोड़ा जा सकता है, और पूरे समाज में नशामुक्ति की भावना को मजबूत करना।

निर्माताओं का मानना है कि नशा अब महामारी का रूप ले चुका है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में नशे से जुड़े अपराधों में पिछले पांच वर्षों में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। फिल्म इसी संकट से जूझते समाज का आईना है। साजिद खान ने आगे बताया कि फिल्म का प्रीमियर जल्द ही रायपुर के प्रमुख सिनेमाघरों में होगा, और इसे छत्तीसगढ़ी बोली में हिंदी सबटाइटल्स के साथ रिलीज किया जाएगा।