गौरा (प्रतापगढ़), 15 अक्टूबर 2025। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के विकास खंड गौरा की सुल्तानपुर ग्राम सभा में पिछले 50 वर्षों से रामलीला का जीवंत मंचन सनातन संस्कृति के प्रति प्रेम और समर्पण का प्रतीक बना हुआ है। श्री आदर्श रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित इस ऐतिहासिक रामलीला के 50वें वर्ष के मंचन ने ग्रामवासियों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी उत्साह का संचार किया है। यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करता है।
श्री आदर्श रामलीला समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद मिश्र ने बताया कि इस वर्ष रामलीला का मंचन विशेष रूप से भव्य और उत्साहपूर्ण है। उन्होंने कहा, 50 वर्षों से निरंतर यह आयोजन हमारी सनातन संस्कृति के प्रति गौरव का प्रतीक है। ग्रामवासियों का सहयोग और कलाकारों का समर्पण इसे और भी खास बनाता है।
समिति के प्रबंधक रामचन्द्र यादव और कोषाध्यक्ष माता प्रसाद जायसवाल आयोजन की व्यवस्था और आर्थिक कार्यों को बखूबी संभाल रहे हैं। उनके अथक प्रयासों से रामलीला का मंचन सुचारू रूप से चल रहा है। रामलीला के मंचन में कलाकारों की भूमिका को डायरेक्टर जगत बहादुर यादव के कुशल निर्देशन में और निखारा गया है।
इस वर्ष भगवान राम की भूमिका सुरेन्द्र यादव, लक्ष्मण की भूमिका विद्याशंकर और माता सीता की भूमिका सौरभ धुरिया निभा रहे हैं। राजा जनक का किरदार जेठू प्रसाद मौर्य, राजा दशरथ की भूमिका डॉ. उमेश चन्द्र शुक्ला और रावण की भूमिका राजेन्द्र प्रसाद ने जीवंत रूप से निभाई है। इसके अलावा, वाणासुर की भूमिका राज बहादुर कनौजिया, परशुराम की भूमिका रामबाबू यादव और भरत की भूमिका गुड्डू दुबे ने बखूबी अदा की है।

सहयोगी के रूप में राजेन्द्र चौरसिया और अन्य सदस्यों का योगदान भी सराहनीय है। रामलीला का मंचन प्रत्येक वर्ष दशहरा पर्व के आसपास आयोजित किया जाता है, जिसमें सुल्तानपुर और आसपास के गांवों के लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। मंचन के दौरान रामायण के प्रमुख प्रसंगों जैसे राम जन्म, सीता स्वयंवर, वनवास, रावण वध आदि को नाटकीय रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा और समर्पण दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। इस वर्ष 50वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजन को और भव्य बनाने के लिए विशेष सजावट और प्रकाश व्यवस्था की गई है। ग्रामवासियों का कहना है कि रामलीला न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह सामाजिक एकता को भी बढ़ावा देता है। युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में यह मंचन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एक स्थानीय दर्शक ने कहा, यह रामलीला हमारे गांव की पहचान है। हर साल हम इसे देखने के लिए उत्साहित रहते हैं। आयोजन समिति ने इस वर्ष दर्शकों की सुविधा के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं भी की हैं, जिसमें बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा और अन्य सुविधाएं शामिल हैं। रामलीला का समापन रावण दहन के साथ होगा, जिसका इंतजार पूरे गांव को है। यह आयोजन सुल्तानपुर की सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का एक अनुपम उदाहरण है।
















