प्रतापगढ़, 17 अक्टूबर 2025। स्वतंत्रता संग्राम के प्रखर सेनानी, शिक्षाविद् और हिन्दी जागरण के अग्रणी वक्ता डॉ. राजेश्वर सहाय त्रिपाठी की जयंती पर जनपद के महुली स्थित वृद्धाश्रम में भावपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रबुद्ध वर्ग ने न केवल उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए, बल्कि उनके आदर्शों एवं मूल्यों को जीवन में उतारने का संकल्प भी लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विभाग प्रचारक ओम प्रकाश ने किया। उन्होंने कहा, डॉ. राजेश्वर सहाय त्रिपाठी जी जैसे सेनानियों ने अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। आज के युवाओं को उनके त्याग से प्रेरणा लेनी चाहिए। अध्यक्षता सच्चा बाबा आश्रम के महंत मनोज ब्रह्मचारी महाराज ने की। मुख्य अतिथि के रूप में आरएसएस के विभाग संघचालक रमेश चंद्र त्रिपाठी उपस्थित रहे।
उन्होंने डॉ. त्रिपाठी के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को रेखांकित करते हुए बताया, 1930 के नमक सत्याग्रह से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक, उन्होंने जेल यात्राएं सहीं और हिन्दी को जन-जन तक पहुंचाया। डॉ. त्रिपाठी के सुपुत्र और वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल प्रताप त्रिपाठी ने भावविभोर होकर कहा, पिताजी के आदर्शों एवं मूल्यों को आगे बढ़ाना ही हमारा जीवन का मुख्य ध्येय है। उन्होंने शिक्षा को स्वतंत्रता का आधार माना और हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए जीवन समर्पित किया।
स्वागत भाषण आचार्य नरेन्द्र देव उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिनैका के प्रधानाचार्य शशिभाल त्रिपाठी ने दिया। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश त्रिपाठी ने उनके शैक्षिक कार्यों और उपलब्धियों को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने बताया, डॉ. त्रिपाठी जी ने 50 से अधिक पुस्तकें लिखीं, जिनमें हिन्दी साहित्य और राष्ट्रवाद पर महत्वपूर्ण ग्रंथ शामिल हैं। उनकी वक्तृताएं लाखों को प्रेरित करती रहीं। समापन भाषण वरिष्ठ पत्रकार विश्वनाथ तिवारी ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, आज के डिजिटल युग में उनके मूल्य और प्रासंगिक हैं। हिन्दी जागरण को नया आयाम देना हमारा कर्तव्य है।
उत्कृष्ट योगदान देने वाली हस्तियों का हुआ सम्मान
इस अवसर पर वृद्धाश्रम के प्रबंधक अंबिका प्रसाद को उनके सराहनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा, वृद्धाश्रम में उपस्थित सभी माता-पिताओं को शाल और फल वितरित कर सम्मान दिया गया। विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली हस्तियों को भी सम्मानित किया गया। इनमें वरिष्ठ पत्रकार राज नारायण शुक्ल, संजय द्विवेदी, बृजेंद्र सिंह बबलू, अखिल नारायण सिंह, सुमन, आशीष त्रिपाठी, दीपेंद्र सिंह दीपू शामिल रहे। कार्यक्रम में राधेश्याम तिवारी, जय प्रकाश उपाध्याय, प्रमोद कुमार तिवारी, जय प्रकाश श्रीवास्तव, अरविंद कुमार पाण्डेय, रमेश मिश्र, राजेश कुमार जायसवाल, सुरेश कुमार मिश्र, हरिकेश कुमार पांडेय, अवनीश कुमार तिवारी, अशोक कुमार यादव, राकेश कुमार पांडेय, पवन कुमार पांडेय, शालू पांडेय, जय शंकर त्रिपाठी, राम शिरोमणि बड़े बाबू, अजब नारायण पांडेय, वेंकटेश त्रिपाठी, विजय प्रताप त्रिपाठी, प्रभात मिश्र, तीर्थराज तिवारी, हरि ओम त्रिपाठी, अंकित त्रिपाठी, इंदुभाल त्रिपाठी, अशोक पांडेय, सुरेश पांडेय, संजय शुक्ल, आलोक पांडेय, प्रभाकर त्रिपाठी, राजीव रंजन त्रिपाठी समेत बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
आकर्षक हिस्सा काव्य सत्र रहा
कार्यक्रम का एक आकर्षक हिस्सा काव्य सत्र रहा। प्रेम कुमार त्रिपाठी ‘प्रेम’, जयराम पांडेय राही, गजेंद्र सिंह ‘विकट’ मीरा तिवारी, महाश्वेता सिंह, कल्पना तिवारी, नवोदित कवयित्री कनक तिवारी, नियाज़ प्रतापगढ़ी और चंद्रकांत त्रिपाठी ‘शाश्वत’ ने काव्य पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इन कविताओं ने माहौल को और भावुक बना दिया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कवि रवीन्द्र अजनबी ने कुशलतापूर्वक किया।













