प्रतापगढ़, 5 नवंबर 2025। यूपी के प्रतापगढ़ में कार्तिक पूर्णिमा पर धर्माचार्य ने जगन्नाथ रथ यात्रा निकाली। उन्होंने इसका महात्म्य भी बताया। यात्रा में धार्मिक उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला। सर्वोदय सद्भावना संस्थान के तत्वावधान में गोपाल मंदिर प्रांगण से भगवान श्री जगन्नाथ जी की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। यह यात्रा न केवल स्थानीय परंपरा का प्रतीक है, बल्कि हिंदू धर्म की गहन आध्यात्मिकता को दर्शा रही थी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास विष्णु भक्ति का सर्वोच्च काल है, जहां तुलसी पूजा और दीप दान से अनंत पुण्य प्राप्त होता है।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रात:काल गोपाल मंदिर में भगवान शालिग्राम के अभिषेक से हुई। दूध, दही, मधु, शकर्रा और गंगाजल से स्नान कराया गया, जो वैदिक परंपरा के अनुरूप था। इसके पश्चात, धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुजदास ने 1000 तुलसी दलों से श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया। तुलसी पत्रों का यह समर्पण कार्तिक मास की विशेषता है, क्योंकि पद्म पुराण के अनुसार, कार्तिक में एक तुलसी दल से ठाकुर जी की सेवा करने वाला व्यक्ति असंख्य पुण्य अर्जित करता है।
धर्माचार्य ने बताया, तुलसी माता का जन्म शुक्रवार को हुआ था। कार्तिक में तुलसी को दीप दान करने से सहस्र गौ दान के बराबर फल मिलता है। यह मास रोग नाशक, सद्बुद्धि प्रदायक और लक्ष्मी साधक है। अभिषेक के बाद भगवान जगन्नाथ जी के विषय में विस्तृत प्रवचन हुआ।
उन्होंने बताया कि प्रतापगढ़ जनपद में 12वीं बार यह रथ यात्रा निकाली जा रही है। वैसे तो सतयुग से पुरी में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को रथ यात्रा होती है, लेकिन कार्तिक पूर्णिमा पर जगन्नाथ जी राजराजेश्वर रूप में पूजे जाते हैं। उन्होंने स्कंद पुराण का उद्धरण प्रस्तुत कर बताया कि कार्तिक मास विष्णु तीर्थ के समान दुर्लभ है। सूर्य के तुला राशि में प्रवेश से प्रारंभ होने वाला यह मास धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के चार पुरुषार्थ प्रदान करता है। दुखों से मुक्ति और लक्ष्मी प्राप्ति का यह सर्वोत्तम समय है। भगवान जगन्नाथ दीनों के दीनानाथ हैं, जिनके साथ बड़े भाई शेषावतार बलभद्र और छोटी बहन सुभद्रा विराजमान रहती हैं।
रथ यात्रा दोपहर में निकली, जो गोपाल मंदिर प्रांगण से होकर प्रमुख मार्गों पर भ्रमण करती रही। रथ को सजाया गया था फूलों, ध्वजाओं और घंटियों से। भक्तों ने ‘जय जगन्नाथ’ के जयकारे लगाते हुए रथ को खींचा, जो पुरी की परंपरा की याद दिलाता था। यह यात्रा सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बनी, जहां विभिन्न जातियों के लोग एकजुट हुए। कार्तिक मास में ऐसी यात्राएं भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती हैं, जैसा कि विष्णु पुराण में वर्णित है।
कार्यक्रम में पं. दिनेश शर्मा, प्रतिनिधि डॉ. महेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री परमानंद मिश्रा, एडवोकेट अशोक शर्मा, नारायणी रामानुज दासी, रमाकांत तिवारी, पुजारी राकेश नारायण पांडे, ज्योतिषाचार्य श्रीमती केतकी सिंह, रितु पांडे, श्रीमती अंजू सिंह, कमला श्रीवास्तव, सरिता शुक्ला, रितु त्रिपाठी, रानी त्रिपाठी, प्रवीण तिवारी, राजा उमर वैश्य, पुनीत तिवारी, धमर्राज शुक्ला, कल्पना तिवारी, कनक तिवारी, शेषमणि पांडे सहित अनेक भक्त उपस्थित रहे। भक्तों ने यात्रा के समापन पर आरती उतारी और प्रसाद वितरण किया।

















