नई दिल्ली, 11 नवंबर 2025। आईएएस दिव्या तंवर आज सोशल मीडिया आईकन हैं। वह उन प्रतिभाशाली युवाओं के लिए प्रेरणा का पुंज हैं जो सेल्फ स्टडी से यूपीएससी की परीक्षा क्रैक करने की इच्छा रखते हैं। दिव्या तंवर ने सेल्फ स्टडी से पहले प्रयास में 438वीं और दूसरे में 105वीं रैंक लाकर आईएएस बनीं।
आज दिव्या तंवर देशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। वह सोशल मीडिया पर सक्रिय रहती हैं और अपने अनुभव व मोटिवेशनल विचार साझा करती हैं। इंस्टाग्राम पर उनके लगभग 90 हजार फॉलोअर्स हैं, जो उनकी कहानी से सीख लेते हैं और अपने सपनों को पूरा करने का हौसला पाते हैं।
देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा लाखों युवाओं का सपना होती है। यह परीक्षा न केवल ज्ञान और बुद्धिमत्ता की, बल्कि दृढ़ संकल्प, धैर्य और आत्मविश्वास की भी परीक्षा लेती है।
हर साल हजारों अभ्यर्थी इसमें अपनी किस्मत आजमाते हैं, लेकिन कुछ ही ऐसे होते हैं जो सीमित साधनों के बावजूद अपने इरादों की ताकत से असंभव को संभव कर दिखाते हैं। हरियाणा की दिव्या तंवर ऐसी ही एक मिसाल हैं, जिन्होंने महज 21 वर्ष की उम्र में बिना कोचिंग के यूपीएससी पास कर पूरे देश में प्रेरणा की मिसाल कायम की।
आईएएस दिव्या तंवर ने वर्ष 2021 में अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास की और 438वीं रैंक हासिल की थी। यह उपलब्धि अपने आप में विशेष थी क्योंकि उन्होंने किसी कोचिंग सेंटर की सहायता नहीं ली थी। मात्र स्वाध्याय और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने इस परीक्षा को पार किया। लेकिन दिव्या यहां नहीं रुकीं, उन्होंने अगले ही वर्ष यानी 2022 में दोबारा परीक्षा दी और इस बार ऑल इंडिया रैंक (AIR) 105 हासिल कर आईएएस बनने का सपना पूरा किया।
बचपन संघर्षों से भरा रहा
हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले की रहने वाली दिव्या तंवर का बचपन संघर्षों से भरा रहा। आर्थिक तंगी के बावजूद उनकी मां ने उन्हें कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। पिता के न रहने के बाद घर की सारी जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई थी, जिन्होंने मजदूरी और छोटे-मोटे काम करके तीन बच्चों की परवरिश की। दिव्या हमेशा कहती हैं कि उनकी सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ उनकी मां का है, जिन्होंने हर मुश्किल में उनका साथ दिया और कभी हौसला टूटने नहीं दिया।
दिव्या को ऐसे मिली थी प्रेरणा
दिव्या की प्रारंभिक शिक्षा एक सरकारी स्कूल से हुई, इसके बाद उनका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय, महेंद्रगढ़ में हुआ। वहीं से उनकी शैक्षणिक प्रतिभा और भी निखरी। उन्होंने विज्ञान विषय में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और कॉलेज से निकलते ही यूपीएससी की तैयारी में जुट गईं। दिव्या ने बताया कि उन्हें आईएएस बनने की प्रेरणा बचपन में तब मिली थी जब उनके स्कूल में एक आईएएस अधिकारी आए थे। उसी क्षण उन्होंने ठान लिया कि एक दिन वो भी देश की सेवा एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में करेंगी।
दिव्या ने तैयारी के दौरान कई चुनौतियों का सामना किया। न तो उनके पास कोई कोचिंग का साधन था, न ही महंगे नोट्स। उन्होंने इंटरनेट, एनसीईआरटी की किताबों और कुछ भरोसेमंद ऑनलाइन सामग्री के जरिए अपनी तैयारी की। उनकी मेहनत, अनुशासन और लगन ने उन्हें सफलता दिलाई।
दिव्या का मानना है कि सफलता पाने के लिए परिस्थितियों से नहीं, अपने दृष्टिकोण से लड़ना जरूरी है। उनका संदेश है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो कोई बाधा बड़ी नहीं होती। उन्होंने यह साबित कर दिया कि सीमित संसाधन भी सफलता की राह में रुकावट नहीं बन सकते।
आईएएस दिव्या तंवर की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखते हैं लेकिन परिस्थितियों के कारण हिम्मत हार जाते हैं। दिव्या ने दिखा दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं। उनकी सफलता सिर्फ एक रैंक नहीं, बल्कि उस संघर्ष, समर्पण और मातृत्व की ताकत की मिसाल है, जो हर युवा को आगे बढ़ने का हौसला देती है।

















