नई दिल्ली, 13 नवंबर 2025। राजधानी दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में हुए आतंकी विस्फोट मामले में जांच एजेंसियों को बड़ा खुलासा हाथ लगा है। गिरफ्तार आरोपियों डॉ. मुजम्मिल, डॉ. अदील, उमर और शाहीन ने मिलकर करीब 20 लाख रुपये नकद जुटाए, जो मुख्य आरोपी उमर को सौंपे गए। इस रकम का इस्तेमाल विस्फोटक सामग्री खरीदने में किया गया। जांच से पता चला है कि आरोपियों ने गुरुग्राम, नूंह और आसपास के इलाकों से 3 लाख रुपये में 20 क्विंटल से अधिक NPK उर्वरक खरीदा, जिससे आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) तैयार किए गए।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने छानबीन में पाया कि यह साजिश महीनों पहले शुरू हो चुकी थी। डॉ. मुजम्मिल और डॉ. अदील, जो पेशे से चिकित्सक हैं, ने अपनी नौकरियों का फायदा उठाकर फंडिंग का इंतजाम किया। उमर, जो ग्रुप का मास्टरमाइंड माना जा रहा है, ने पैसों को संभाला। शाहीन ने स्थानीय संपर्कों से उर्वरक की खरीदारी की।
एनआईए सूत्रों के अनुसार, NPK उर्वरक जो आमतौर पर कृषि में इस्तेमाल होता है को विस्फोटक बनाने के लिए रासायनिक प्रक्रिया से बदला गया। यह सामग्री हरियाणा के नूंह जिले के गोदामों से खरीदी गई, जहां आरोपियों ने फर्जी नामों का सहारा लिया। जांच में एक और सनसनीखेज मोड़ आया जब उमर और डॉ. मुजम्मिल के बीच पैसे को लेकर गंभीर विवाद सामने आया। उमर ने मुजम्मिल पर आरोप लगाया कि वह फंड का हिस्सा छिपा रहा है, जबकि मुजम्मिल ने उमर की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।
यह विवाद सिग्नल ऐप पर बने एक छोटे ग्रुप में हुआ, जिसमें सिर्फ 2-4 सदस्य थे। एनआईए ने इस ग्रुप के चैट रिकॉर्ड बरामद कर लिए हैं, जहां साजिश की बारीकियां चर्चा की गईं। ग्रुप में कोड वर्ड्स जैसे ‘खाद’ (उर्वरक के लिए) और ‘पैकेज’ (IED के लिए) इस्तेमाल हुए।विस्फोट के बाद से एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज, फोन रिकॉर्ड और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच कर रही हैं।
आरोपियों को पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन से लिंक बताया जा रहा है, जो फंडिंग और ट्रेनिंग मुहैया करा रहा था। एनआईए ने गुरुग्राम और नूंह में छापे मारकर अतिरिक्त सबूत जुटाए, जिसमें विस्फोटक बनाने के उपकरण मिले।मामले में अब तक 4 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, और एजेंसियां अन्य संदिग्धों की तलाश में हैं।
लगभग आठ संदिग्धों ने चार जगहों पर सिलसिलेवार विस्फोट करने की योजना बनाई थी। उनकी योजना दो-दो के समूहों में चार शहरों में जाने की थी। प्रत्येक समूह अपने साथ कई आईईडी ले जाने वाला था।
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