रायपुर, 15 नवंबर 2025। नदियों और जलस्रोतों के लिए प्लास्टिक कचरा बड़ी समस्या बन चुका है। इससे प्रदूषण तो बढ़ ही रहा है, संक्रामक बीमारियों को भी फैला रहा है। छत्तीसगढ़ के मेधावी युवा पार्थ विश्वास ने इसके लिए अनोखा समाधान खोज निकाला है। उन्होंने एआई आधारित एक अत्याधुनिक तकनीक विकसित की है, जिसे 31 अक्टूबर 2025 को आधिकारिक तौर पर पेटेंट मिल चुका है। यह तकनीक देश में अपनी तरह की पहली एआई प्रणाली आधारित तकनीकि मानी जा रही है, जो नदियों से प्लास्टिक कचरे की पहचान से लेकर संग्रहण और उसे क्रूड आयल में बदलने तक की संपूर्ण प्रक्रिया को संचालित करेगी।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के रहने वाले पार्थ विश्वास ने बताया कि उनका यह इनोवेशन पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा उत्पादन दोनों क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकता है। एआई मॉडल ड्रोन, हाई-रेजोल्यूशन सेंसर और मशीन लर्निंग तकनीक का उपयोग कर नदी में मौजूद प्लास्टिक की 98% सटीकता से पहचान करता है। इसके बाद स्वचालित रोबोटिक आर्म्स और ड्रोन मिलकर कचरे को स्मार्ट ढंग से एकत्रित करते हैं। संग्रहित प्लास्टिक को पायरोलिसिस तकनीक के जरिए क्रूड आयल तैयार होता है। यह ईंधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है, जिससे ऊर्जा का नया और टिकाऊ विकल्प उपलब्ध होगा।
पार्थ ने बताया कि नदियों में फैला प्लास्टिक जलजीवों और मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। इसी समस्या को देखते हुए उन्होंने स्थानीय नदियों में शुरुआती सर्वेक्षण किया। प्लास्टिक की पहचान के लिए हजारों इमेज और डेटा पर एआई मॉडल को ट्रेन किया गया, जिससे सिस्टम विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक को बेहद सटीक तरीके से पहचान सके।
इस तकनीक को पेटेंट मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी चर्चा तेजी से बढ़ी है। पार्थ ने बताया कि कई विदेशी कंपनियों और निवेशकों ने सहयोग का प्रस्ताव दिया है, लेकिन वे इस प्रोजेक्ट को भारत में ही विकसित करना चाहते हैं। उनका सपना है कि छत्तीसगढ़ और पूरे भारत की नदियों को प्लास्टिक से मुक्त किया जाए।
पार्थ का यह इनोवेशन न सिर्फ जलस्रोतों की सफाई में क्रांति लाएगा, बल्कि रोजगार सृजन, अपशिष्ट प्रबंधन और सर्कुलर इकोनॉमी को भी बढ़ावा देगा। यह पहल मेक इन इंडिया और स्वच्छ भारत जैसे राष्ट्रीय अभियानों को मजबूती देने वाली साबित हो सकती है। रायगढ़ का यह युवा इंजीनियर अब देशभर में प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।

















