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भारत-ब्राजील के संबंधों को नई दिशा देगा आयुर्वेद

भारत-ब्राजील के संबंधों को नई दिशा देगा आयुर्वेद

साओ पाउलो, 16 नवंबर 2025। ब्राजील के साओ पाउलो शहर ने आयुर्वेद की प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति को एक नई ऊंचाई प्रदान करते हुए 14-15 नवंबर को तीसरा अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद सम्मेलन का सफल आयोजन किया।

स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र (एसवीसीसी) और कोनायुर (ब्राजील का प्रमुख आयुर्वेदिक संस्थान) के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के संयोजन में आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम ने लैटिन अमेरिका और भारत के विशेषज्ञों, चिकित्सकों, विद्वानों तथा छात्रों को एक मंच पर लाकर आयुर्वेद के वैश्विक प्रसार को मजबूत किया।

सम्मेलन का केंद्रीय विषय ‘आयुर्वेद में विविधता और समावेश: प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक प्राणी की देखभाल’ रहा, जो इस पद्धति की समग्रता और करुणा को रेखांकित करता है।यह आयोजन ब्राजील में आयुर्वेद के 40 वर्ष पूरे होने का प्रतीक था। 1985 में यहां पहली बार आयुर्वेद की शुरुआत हुई थी, और आज यह दक्षिण अमेरिका का पहला देश है जहां आयुर्वेद को आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त है।

सम्मेलन के दौरान घोषणा की गई कि आयुर्वेद को अब ब्राजीलियाई व्यवसायों के वर्गीकरण में शामिल कर लिया गया है, जो व्यावसायिक विनियमन के लिहाज से एक ऐतिहासिक कदम है। कोनायुर जैसे संस्थानों ने पिछले चार दशकों में ब्राजील में आयुर्वेद को शिक्षण, शोध और चिकित्सा के माध्यम से मजबूती प्रदान की है।

सम्मेलन का उद्घाटन ब्राजील में भारत के राजदूत दिनेश भाटिया ने किया। उन्होंने भारत और ब्राजील के बीच पारंपरिक स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों में बढ़ते सहयोग पर प्रकाश डाला। श्री भाटिया ने कहा, आयुर्वेद की वैश्विक प्रासंगिकता वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से सुदृढ़ हो रही है। यह प्रासंगिकता 17 से 19 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) आयुष मंत्रालय के वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन में और स्पष्ट होगी।

उन्होंने ब्राजील के अग्रणी योगदान की सराहना की और ब्राजील के उपराष्ट्रपति गेराल्डो अल्कमिन की हालिया अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों का मील का पत्थर बताया। आयुष मंत्रालय के सचिव डॉ. (वैद्य) राजेश कोटेचा ने अपने संबोधन में आयुर्वेद को समावेशिता, करुणा और शरीर-मन-पर्यावरण के समग्र संतुलन का प्रतीक बताया। उन्होंने भारत-ब्राजील की मजबूत साझेदारी का जिक्र किया, जो स्वास्थ्य मंत्रालयों के बीच समझौता ज्ञापन और राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर तथा ब्राजीलियाई विश्वविद्यालयों के संस्थागत सहयोग से और सशक्त हुई है।

डॉ. कोटेचा ने ब्राजील में आयुर्वेद को आगे बढ़ाने वाले शिक्षकों, शोधकर्ताओं और चिकित्सकों का आभार जताया। केंद्रीय आयुष मंत्री सरदार जगन्नाथ राव जाधव की ओर से उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

एसवीसीसी की निदेशक डॉ. ज्योति किरण शुक्ला ने भारत-ब्राजील के बीच स्वास्थ्य परंपराओं की साझा विरासत पर जोर दिया। उन्होंने एसवीसीसी और आईसीसीआर की भूमिका को रेखांकित किया, जो सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग को प्रोत्साहित कर रही है। साओ पाउलो में भारत के महावाणिज्य दूत हंसराज सिंह वर्मा ने प्राकृतिक और निवारक स्वास्थ्य समाधानों में दोनों देशों के सहयोग के महत्व को उजागर किया।

सम्मेलन में विषयगत व्याख्यान, पूर्ण सत्र और एक आम सभा का आयोजन किया गया। चर्चाओं में प्राचीन ज्ञान, आयुर्वेद में विविधता-समावेश, तथा ब्राजील में इसकी व्यावसायिक विनियमन जैसे मुद्दों पर गहन विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने आयुर्वेद को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने पर बल दिया, जहां यह न केवल रोग निवारण बल्कि जीवनशैली सुधार का माध्यम बन सकता है। लैटिन अमेरिकी प्रतिनिधियों ने ब्राजील के स्वास्थ्य प्रणाली में आयुर्वेद के एकीकरण की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। आयोजकों ने आगामी सम्मेलनों के लिए उत्साह व्यक्त किया, जो भारत-ब्राजील संबंधों को नई दिशा देंगे।