बेलेम, 20 नवंबर 2025। भारत के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री, भूपेंद्र यादव ने 11वीं जॉइंट क्रेडिटिंग मैकेनिज्म (जेसीएम) के साझेदार देशों की बैठक में हिस्सा लिया। यह बैठक 19 नवंबर 2025 को जापान के पर्यावरण मंत्रालय ने आयोजित की। बैठक ब्राजील के बेलेम में यूएनएफसीसीसी कॉप 30 के दौरान हुई। बैठक की अध्यक्षता जापान के पर्यावरण मंत्री महामहिम हिरोताका इशिहारा ने की।
संयुक्त ऋण व्यवस्था (जेसीएम) मूल रूप से जापान द्वारा शुरू की गई द्विपक्षीय पहल है, जो भारत जैसे साझेदार देशों में निम्न-कार्बन प्रौद्योगिकियों और निवेश के प्रवाह को प्रोत्साहित करती है। इस व्यवस्था के तहत, परियोजनाओं से होने वाले उत्सर्जन में कमी का श्रेय साझेदार देश और जापान दोनों को संयुक्त रूप से दिया जाता है, जिससे उन्हें अपने-अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलती है। उन्होंने जेसीएम साझेदार देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर इस प्रक्रिया की समीक्षा की।
उन्होंने दोनों देशों के जलवायु सहयोग को मज़बूत करने की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि की। शुरुआती भाषण में महामहिम इशिहारा ने बताया कि जेसीएम ने अपने साझेदारों की सूची बढ़ाकर 31 कर दी है और पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 के अनुसार 280 से ज़्यादा परियोजनाएं लागू की जा रही हैं। उन्होंने आशा प्रकट की कि लंबे समय के निवेश के लिए रूपरेखा बनाकर, जलवायु लचीली परियोजनाओं में साझेदार देशों के लिए भागीदारी के अवसर पक्के करके और क्षमता बढ़ाने के कार्यक्रमों को समर्थन करके, दुनिया भर में सहयोग का विस्तार किया जाएगा।
इस अवसर पर श्री यादव ने ऐसे समय में सहयोग व्यवस्था के महत्व पर ज़ोर दिया जब दुनिया मापन योग्य, समान और प्रौद्योगिकी-चालित जलवायु समाधान ढूंढ रही है। उन्होंने ज़ोर दिया कि जेसीएम जैसी व्यवस्था विशेषरूप से विकासशील देशों के लिए, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को समर्थन प्रदान करते हुए जलवायु कार्रवाई के प्रयासों को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के बीच विश्वास, प्रौद्योगिकी सहयोग और टिकाऊ विकास के लिए साझा प्रतिबद्धता पर आधारित लंबे समय से चली आ रही साझेदारी है।

















