बेलेम, 20 नवंबर 2025। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री, भूपेंद्र यादव ने 11वीं जॉइंट क्रेडिटिंग मैकेनिज्म (जेसीएम) के साझेदार देशों की बैठक में हिस्सा लिया। भारत-जापान सहयोग ज्ञापन पर 7 अगस्त 2025 को हस्ताक्षर होने का ज़िक्र करते हुए, श्री यादव ने ज़ोर देकर कहा कि जेसीएम पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6 के अनुसार है और सरकारों और निजी क्षेत्रों दोनों को मिलकर जलवायु परिवर्तन का असर कम करने की परियोजनाएं विकसित करने, फाइनेंस जुटाने, उन्नत प्रौद्योगिकी का उपयोग करने और इससे होने वाले उत्सर्जन में कमी को पारदर्शी तरीके से बांटने के लिए स्पष्ट रूपरेखा प्रदान करती है। उन्होंने यह भी कहा कि यह इस बात का उदाहरण है कि कैसे द्विपक्षीय सहयोग व्यावहारिक और आपसी लाभ वाले तरीके से बहुपक्षीय लक्ष्यों को मज़बूत कर सकता है।
मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जेसीएम सीधे तौर पर भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान और दीर्घावधि निम्न उत्सर्जन विकास रणनीति में योगदान देगा। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 6 को लागू करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित एजेंसी द्वारा मंज़ूर की गई निम्न-कार्बन प्रौद्योगिकी हमारे दीर्घावधि लक्ष्यों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
श्री यादव ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस व्यवस्था से उन्नत निम्न-कार्बन प्रौद्योगिकी को लागू करने के लिए निवेश, प्रौद्योगिकी तैनाती और क्षमता निर्माण समर्थन को आसान बनाने की आशा है। उन्होंने कहा कि इससे घरेलू इकोसिस्टम बनाने और हाई-टेक्नोलॉजी इंटरवेंशन को स्थानीय रूप देने में मदद मिलेगी, साथ ही भारत के टिकाऊ विकास लक्ष्यों में भी योगदान मिलेगा।
साझेदारों को श्री यादव ने बताया कि इसे लागू करने की रूपरेखा पर काम अच्छी तरह से आगे बढ़ रहा है। कार्यान्वयन के नियम और मुख्य एक्टिविटी-साइकिल डॉक्यूमेंट्स फाइनल होने के अग्रिम चरण में हैं। भारत में ऊर्जा दक्षता ब्यूरो भी इंडियन कार्बन मार्केट पोर्टल डेवलप कर रहा है। उन्होंने बताया कि पोर्टल में अनुच्छेद 6 के तहत संयुक्त ऋण व्यवस्था और दूसरे सहयोगात्मक तरीकों के लिए समर्पित मॉड्यूल शामिल होगा, जिससे पारदर्शिता, दक्षता बढ़ाने और परियोजना को आसान बनाने में सुविधा सुनिश्चित होगी।
भविष्य के रास्तों की जानकारी देते हुए, मंत्री ने कहा कि जेसीएम गतिविधियां भंडारण के साथ नवीकरणीय ऊर्जा, टिकाऊ विमान ईंधन, कम्प्रेस्ड बायोगैस,ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में, और स्टील, सीमेंट और केमिकल्स जैसे कठिन क्षेत्रों शामिल होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र भारत की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं और सहयोग के लिए महत्वपूर्ण अवसर देते हैं।
श्री यादव ने जापान और सभी जेसीएम साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करने के भारत की प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की और कहा, जापान के साथ हमारा सहयोग दिखाता है कि कैसे पूरी सत्यनिष्ठा, सहयोगात्मक व्यवस्था सही प्रौद्योगिकी की तैनाती में निवेश का समर्थन कर सकती हैं और साथ ही पेरिस समझौते को लागू करने की प्रक्रिया भी मज़बूत कर सकती हैं। भाषण के अंत में, उन्होंने मिलकर काम करने की अपील की ताकि यह पक्का हो सके कि जेसीएम पारदर्शी, असरदार और सामान जलवायु साझेदारी के लिए मॉडल बने।

















