भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के 56वें संस्करण में प्रदान किया गया प्रतिष्ठित पुरस्कार
गोवा, 29 नवंबर 2025। इस बार प्रतिष्ठित पुरस्कार आईसीएफटी-यूनेस्को गांधी पदक नॉर्वेजियन फिल्म सेफ हाउस को मिला है। भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी 2025) के 56वें संस्करण में आईसीएफटी-यूनेस्को गांधी पदक प्रदान किया गया। अंतर्राष्ट्रीय फिल्म, टेलीविजन और दृश्य-श्रव्य संचार परिषद (आईसीएफटी) और यूनेस्को के सहयोग से स्थापित यह पुरस्कार उन फिल्मों को सम्मानित करता है, जो सहिष्णुता, अंतर-सांस्कृतिक संवाद एवं शांति की संस्कृति के आदर्शों को प्रतिबिंबित करती हैं।
यह पुरस्कार शांति, अहिंसा एवं अंतर-सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने वाले सिनेमा में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया है। इस फिल्म के निर्देशक एरिक स्वेन्सन की ओर से आईसीएफटी-यूनेस्को पेरिस के मानद प्रतिनिधि मनोज कदम ने प्राप्त किया। एनएफडीसी के एमडी प्रकाश मगदुम ने इस पुरस्कार को प्रदान किया।
फिल्म सेफ हाउस में क्या
सेफ हाउस 2013 में मध्य अफ्रीकी गणराज्य में हुए गृहयुद्ध के दौरान बांगुई स्थित डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के अस्पताल में घटित लगातार 15 घंटों की वास्तविक घटनाओं से प्रेरित एक मार्मिक, मानवीय और गहन भावनात्मक ड्रामा है।
फिल्म युद्धग्रस्त क्षेत्र में कार्यरत सहायता कर्मियों की उस टीम पर केंद्रित है, जो अराजकता और हिंसा के बीच असंभव निर्णयों, सीमित संसाधनों और बढ़ते दबाव के बीच मानव जीवन बचाने के लिए प्रयासरत रहती है।
यह देखभाल, साहस, कर्तव्य और ज़िम्मेदारी जैसे नैतिक मूल्यों की गहराई से पड़ताल करती है। वास्तविक समय में आगे बढ़ती इसकी कहानी, दर्शकों को न केवल युद्ध क्षेत्र की भयावह वास्तविकताओं से रूबरू कराती है, बल्कि उन लोगों के लचीलेपन, धैर्य और करुणा को भी उजागर करती है।
फिल्म निर्माता एरिक स्वेन्सन
नई पीढ़ी के नॉर्वेजियन फिल्म निर्माता एरिक स्वेन्सन अपनी विशिष्ट शैली और संवेदनशील कहानी कहने के लिए पहले से ही अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल कर चुके हैं। उनकी चर्चित फ़िल्में वन नाइट इन ओस्लो और हाराजुकु कई प्रतिष्ठित समारोहों में सराही गईं। उनकी नवीनतम फिल्म सेफ हाउस का विश्व प्रीमियर 48वें गोटेबोर्ग फिल्म महोत्सव 2025 में उद्घाटन फिल्म के रूप में हुआ, जहां इसे दर्शकों की व्यापक प्रशंसा मिली और सर्वश्रेष्ठ नॉर्डिक फिल्म के लिए ऑडियंस ड्रैगन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
आईसीएफटी-यूनेस्को गांधी पदक के बारे में
- यह पुरस्कार 46वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के दौरान प्रारंभ किया गया।
- यह पुरस्कार उत्कृष्ट कलात्मकता एवं उच्च सिनेमाई मानकों को प्रदर्शित करने के साथ-साथ समाज के महत्वपूर्ण और समकालीन मुद्दों पर नैतिक विमर्श को प्रोत्साहित करने वाली फिल्मों को दिया जाता है।
- यह प्रतिष्ठित पुरस्कार सिनेमा की परिवर्तनकारी शक्ति के माध्यम से मानवता के साझा मूल्यों, शांति, करुणा और संवाद की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया गया है।
- आईसीएफटी यूनेस्को गांधी पदक महज एक पुरस्कार नहीं है; यह प्रेरणा देने, शिक्षित करने और एकजुट करने की फिल्म की शक्ति का उत्सव है।
इफ्फी के बारे में
वर्ष 1952 में स्थापित भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) दक्षिण एशिया के सबसे पुराने और सबसे प्रतिष्ठित सिनेमा उत्सवों में से एक है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) गोवा सरकार के गोवा मनोरंजन सोसायटी (ईएसजी) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह महोत्सव आज एक वैश्विक सिनेमाई मंच के रूप में पहचान रखता है।
यहां पर पुनर्स्थापित क्लासिक फ़िल्में साहसिक प्रयोगधर्मिता से मिलती हैं और दिग्गज कलाकारों के साथ उभरते प्रतिभाशाली फिल्मकार भी समान रूप से मंच साझा करते हैं। इफ्फी की सबसे बड़ी खासियत उसका विविधतापूर्ण आकर्षक मिश्रण है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक प्रदर्शनियां, मास्टरक्लास, विशेष श्रद्धांजली कार्यक्रम और ऊर्जा से भरा वेव्स फिल्म बाजार शामिल हैं।
यहां पर नए विचार, महत्त्वपूर्ण सौदे और वैश्विक सहयोग लगातार जन्म लेते हैं। 20 से 28 नवंबर 2025 तक गोवा की मनमोहक तटीय पृष्ठभूमि में आयोजित हुए इस महोत्सव के 56वें संस्करण ने भाषाओं, शैलियों, रचनात्मक नवाचारों और नई ध्वनियों की चकाचौंध भरी श्रृंखला प्रस्तुत की।
















