लखनऊ, 3 दिसंबर 2025। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बाबू बनारसी दास इंडोर स्टेडियम में खेले गए सैयद मोदी इंडिया इंटरनेशनल बैडमिंटन टूर्नामेंट (सुपर 300) के फाइनल में भारतीय प्रशंसकों को खुशी और मायूसी एक साथ मिली। जहां महिला युगल में त्रीसा जोली और गायत्री गोपीचंद ने शानदार खेल दिखाते हुए लगातार दूसरी बार खिताब पर कब्जा जमाया, वहीं पुरुष एकल में पूर्व विश्व नंबर-1 किदांबी श्रीकांत फाइनल में हारकर 2017 के बाद से किसी टूर्नामेंट का खिताब जीतने से फिर चूक गए।
महिला युगल फाइनल में भारतीय जोड़ी त्रीसा जोली और गायत्री गोपीचंद का मुकाबला जापान की काहो ओसावा और माई तनाबे से था। मैच की शुरुआत में जापानी जोड़ी ने दबदबा बनाया और पहला गेम 21-17 से अपने नाम कर लिया। लेकिन इसके बाद भारतीय जोड़ी ने शानदार वापसी की। दूसरे गेम में त्रीसा और गायत्री ने शुरू से ही आक्रामक रुख अपनाया और 9-2 की बड़ी बढ़त बनाकर गेम 21-13 से जीत लिया।
निर्णायक गेम में भी भारतीयों ने अपनी लय बरकरार रखी। बीच में कुछ गलतियों से स्कोर करीब आया, लेकिन त्रीसा की तेज नेट प्ले और गायत्री के दमदार स्मैश ने भारतीय जोड़ी को छह मैच प्वाइंट दिलाए। दूसरे मौके पर उन्होंने 21-18 से गेम जीतकर खिताब अपने नाम कर लिया। यह उनकी लगातार दूसरी सैयद मोदी खिताबी जीत है। दूसरी तरफ पुरुष एकल फाइनल में किदांबी श्रीकांत और हांगकांग के जेसन गुनावन के बीच 67 मिनट तक चला रोमांचक मुकाबला देखने को मिला।
विश्व रैंकिंग में 59वें स्थान पर काबिज गुनावन ने श्रीकांत को 16-21, 21-8, 22-20 से हराकर करियर का सबसे बड़ा खिताब जीता। पहला गेम श्रीकांत ने अपनी आक्रामकता से 21-16 से जीता। दूसरे गेम में गुनावन ने जबरदस्त वापसी करते हुए 21-8 से एकतरफा जीत दर्ज की। निर्णायक गेम में श्रीकांत ने 5-1 की बढ़त बनाई और एक समय 11-8 से आगे भी थे, लेकिन गुनावन की शानदार रिट्रीवल और सटीक स्मैश ने मैच का रुख पलट दिया।
अंतिम क्षणों में श्रीकांत के पास मौका था, लेकिन उनकी अंतिम शॉट लाइन से बाहर चली गई और खिताब हाथ से फिसल गया।2017 फ्रेंच ओपन के बाद से श्रीकांत कोई व्यक्तिगत खिताब नहीं जीत पाए हैं। इस हार के साथ उनकी खिताबी सूखा आठ साल से भी अधिक लंबी हो गई। फिर भी फाइनल तक का उनका सफर सराहनीय रहा।
टूर्नामेंट के समापन पर भारतीय बैडमिंटन संघ के अधिकारियों ने दोनों विजेताओं को बधाई दी और कहा कि त्रीसा-गायत्री की जोड़ी भविष्य में भारत को कई और बड़े खिताब दिलाएगी। लखनऊ में आयोजित इस टूर्नामेंट ने एक बार फिर साबित किया कि भारतीय बैडमिंटन लगातार ऊंचाइयों को छू रहा है, भले ही कुछ बड़े खिताब अभी भी दूर हों।
















