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कौन हैं पंकज चौधरी जिनके घर पैदल गये थे पीएम मोदी

लखनऊ, 13 दिसंबर 2025। उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के 17वें प्रदेश अध्यक्ष बनने जा रहे पंकज चौधरी को लेकर प्रदेश की राजनीति में खासा उत्साह है। संगठन और सरकार दोनों में मजबूत पकड़ रखने वाले पंकज चौधरी कुर्मी बिरादरी से आते हैं और सात बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। वह मूल रूप से गोरखपुर के निवासी हैं और वर्तमान में महराजगंज संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं। इसके साथ ही वे केंद्र सरकार में वित्त राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।

पंकज चौधरी का राजनीतिक सफर लंबा और अनुभव से भरा रहा है। संगठनात्मक कार्यों में उनकी सक्रिय भूमिका और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से सीधा जुड़ाव उन्हें पार्टी के भीतर एक मजबूत नेता बनाता है। उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का करीबी भी माना जाता है, जिससे संगठन में उनकी स्थिति और मजबूत होती है। पार्टी नेतृत्व को भरोसा है कि उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में भाजपा संगठन को नई मजबूती मिलेगी।

पंकज चौधरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पसंदीदा नेताओं में भी गिने जाते हैं। इसका एक चर्चित उदाहरण 7 जुलाई 2023 को गोरखपुर में देखने को मिला था, जब गीता प्रेस के शताब्दी वर्ष समारोह के दौरान प्रधानमंत्री बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के समय निकालकर पंकज चौधरी के घर पहुंचे थे। यह घटना उस समय राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का विषय बन गई थी।

गोरखपुर के घंटाघर क्षेत्र की हरिवंश गली में स्थित पंकज चौधरी का आवास संकरी सड़क पर होने के कारण प्रधानमंत्री का वाहन करीब 200 मीटर पहले ही रुक गया था। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ पैदल चलकर उनके घर पहुंचे। यह दृश्य लोगों के लिए बेहद खास रहा और इसे सादगी व आत्मीयता का प्रतीक माना गया।

पंकज चौधरी के घर पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे सहज भाव में पूछा था कि “जूता निकालकर अंदर जाना है?” इस पर पंकज चौधरी ने विनम्रता से आग्रह किया कि वे जूता पहनकर ही अंदर चलें। इसके बाद सभी लोग घर के भीतर गए। प्रधानमंत्री के इस सरल और अपनत्व भरे व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसे लोगों ने खूब सराहा।

अपने कार्य व्यवहार और सादगी के कारण पंकज चौधरी न सिर्फ पार्टी नेतृत्व बल्कि आम लोगों के बीच भी लोकप्रिय हैं। अब जब वे यूपी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बनने जा रहे हैं, तो उनसे संगठन को मजबूत करने, सामाजिक संतुलन साधने और आगामी चुनावों की तैयारी को नई दिशा देने की उम्मीद की जा रही है।