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पुलिसिंग में कौशल सबसे महत्वपूर्ण : सुभाष चन्द्र दुबे

पुलिसिंग में कौशल सबसे महत्वपूर्ण : सुभाष चन्द्र दुबे

लखनऊ, 13 दिसंबर 2025। उत्तर प्रदेश राज्य फोरेंसिक विज्ञान संस्थान (यूपीएसआईएफ) द्वारा साइबर सुरक्षा और डिजिटल फोरेंसिक विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण लखनऊ स्थित यूपीएसआईएफ परिसर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना था।

प्रशिक्षण के समापन सत्र में आईजी सुभाष चन्द्र दुबे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा जैसे विषय आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत हैं।

आईजी सुभाष दुबे ने कहा कि अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब अपराधी तकनीक का अधिक उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस को भी तकनीकी रूप से मजबूत होना होगा। डिजिटल फोरेंसिक और साइबर जांच की जानकारी अब अनिवार्य हो गई है।

उन्होंने कहा कि पुलिसिंग में कौशल सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। केवल अनुभव से काम नहीं चलता। नवीन तकनीक की समझ जरूरी है। इसी सोच के साथ ऐसे प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं। आईजी दुबे ने कहा कि सीखना एक सतत प्रक्रिया है। हर प्रशिक्षण अधिकारी को नई दृष्टि देता है। यह दक्षता बढ़ाने में सहायक होता है। प्रशिक्षण से आत्मविश्वास भी मजबूत होता है।

उन्होंने अधिकारियों को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा चुनौतीपूर्ण है। तनाव से बचना बेहद जरूरी है। स्वस्थ शरीर और संतुलित मन से ही बेहतर कार्य संभव है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 40 अधिकारियों ने भाग लिया।

प्रतिभागी उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से भी आए। दिल्ली, हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु के अधिकारी शामिल हुए। इससे प्रशिक्षण का स्तर और अनुभव साझा करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान साइबर अपराधों की पहचान पर विशेष ध्यान दिया गया। डिजिटल साक्ष्यों के संग्रह की जानकारी दी गई। मोबाइल और कंप्यूटर फोरेंसिक के बारे में विस्तार से बताया गया। डेटा रिकवरी और साइबर ट्रेसिंग पर भी सत्र आयोजित हुए।

अपर निदेशक राजीव मल्होत्रा ने अपने संबोधन में कहा कि वतर्मान दौर में पुलिस के लिए तकनीक की समझ अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। इन अपराधों से निपटने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन जरूरी है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से जांच की गुणवत्ता बेहतर होती है। अपराधियों तक पहुंचने में मदद मिलती है। डिजिटल सबूत अदालत में मजबूत आधार बनते हैं।

आईजी सुभाष दुबे ने यूपीएसआईएफ को उत्कृष्ट संस्थान बनाने में निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्थान निरंतर नए विषयों पर प्रशिक्षण दे रहा है। यह पुलिस विभाग के लिए लाभकारी है।

कार्यक्रम के अंत में प्रशासनिक अधिकारी अतुल यादव ने सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम के संचालन में कई चुनौतियां आईं। इसके बावजूद प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा हुआ। यह सभी अधिकारियों और फैकल्टी के सहयोग का परिणाम है।

समारोह में कई वरिष्ठ अधिकारी और फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे। एआर विवेक कुमार, जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी भी मौजूद रहे। प्रतिसार निरीक्षक बृजेश सिंह ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया। फैकल्टी के रूप में डॉ. मनीष राय, गिरिजेश राय, शैलेन्द्र सिंह शामिल रहे। डॉ. पलक और कार्तिकेय ने तकनीकी सत्रों का संचालन किया।