प्रयागराज, 15 दिसंबर 2025। शिक्षा, साहित्य और अध्यात्म की धरती प्रयागराज में काव्यांगन साहित्यिक मंच ने ऐतिहासिक आयोजन किया। इस आयोजन में ग्रंथों का विमोचन और साहित्यिक विमर्श हुए। कार्यक्रम राज्य शिक्षक प्रशिक्षण अतिथि गृह में आयोजित किया गया।
प्रथम सत्र में काव्यांगन के संस्थापक स्वर्गीय प्रोफेसर रामकृष्ण शर्मा जी स्मृति सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। यह सम्मान लोकेश कुमार शुक्ला पूर्व निदेशक आकाशवाणी प्रयागराज को दिया गया। शिक्षा सेवा चयन आयोग के दो सदस्य प्रो. विनोद कुमार सिंह और विमल कुमार विश्वकर्मा का भी सम्मान किया गया।
मुख्य अतिथि लोकेश कुमार शुक्ल रहे। उन्होंने कहा कि साहित्यिक गतिविधियां मानव जीवन को सात्विकता की ओर ले जाती हैं। उनकी सांस्कृतिक विरासत का पोषण करती हैं। उन्होंने अपनी एक रचना
मैंने भी जीवन देखा है
आज उनकी पलकों में
मैंने एक आधार देखा है
सुनाई। प्रो. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि प्रयागराज की धरती साहित्य दृष्टि से पहले से ही उर्वरा है। काव्यांगन के इस कार्यक्रम ने इस पावन धरती को और महत्वपूर्ण बना दिया है। प्रो. विमल विश्वकर्मा ने कहा कि साहित्य समाज परिवर्तन का कारक रहा है। वह सदैव सामाजिक गतिविधियों का दर्पण भी रहा है।
द्वितीय सत्र भी साहित्यिक गतिविधियों के लिए समर्पित रहा। इस सत्र के मुख्य अतिथि प्रोफेसर राज नारायण शुक्ला सदस्य शिक्षा सेवा चयन आयोग रहे। उन्होंने कहा कि साहित्य ने सदैव देश की दिशा का परिवर्तन किया है। आदिकाल में जब राजा युद्ध हार रहे होते थे तो वीर रस के कवियों को बुलाया जाता था। उनसे सैनिकों के बीच में कविताएं पढ़ाई जाती थी। जिससे प्रेरित होकर सैनिक युद्ध में विजय प्राप्त करते थे।
कार्यक्रम के समापन सत्र में काव्यांगन के ग्रंथ अब चले आओ का लोकार्पण उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष राम सुचित ने किया। अध्यक्षता प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने की। राम सुचित ने कहा कि साहित्य व्यक्ति की ही नहीं बल्कि समाज की पीड़ा को भी दूर करता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र के संकल्पों को पूरा करने में कवियों ने बहुत बड़ा योगदान दिया है। उनकी जनाकांक्षाओं को ही प्रकट करने में कवियों की प्रमुख भूमिका रही है। उन्होंने 70 से अधिक साहित्यकारों को सम्मानित किया। दो दिन तक चल साहित्यिक विमर्श के पश्चात साहित्य की और खासतौर से हिंदी की बढ़ती लोकप्रियता और उपयोगिता को सभी साहित्यकारों ने रेखांकित किया।
कार्यक्रम का संयोजन और संचालन रमापति त्रिवेदी प्रोफेसर राधाकृष्ण दीक्षित और विवेक गोयल ने किया। कार्यक्रम के अंत में सभी को आभार व्यक्त किया गया और वंदे मातरम के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
















