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भाषाई स्वाभिमान के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता अधूरी : महादेवन

भाषाई स्वाभिमान के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता अधूरी : महादेवन

नई दिल्ली, 21 दिसंबर 2025। भारतीय भाषा अभियान और भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय भाषा दिवस के अवसर पर एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन भारतीय विधिज्ञ परिषद, नई दिल्ली के सभागार में किया गया। इस कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आर. महादेवन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भारतीय शिक्षा बोर्ड के प्रमुख डॉ. अतुल कोठारी रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता एवं भारतीय भाषा अभियान के राष्ट्रीय संयोजक जयदीप रॉय की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का आयोजन भारतीय भाषा अभियान दिल्ली प्रांत के संयोजक राघवेंद्र शुक्ला एवं सहसंयोजक कृष्ण कुमार शर्मा के संयोजन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं महाकवि चिन्नास्वामी सुब्रमण्यम भारती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन किया गया और अतिथियों का स्वागत-अभिनंदन किया गया।

अपने उद्बोधन में विशिष्ट अतिथि जयदीप रॉय ने कहा कि 11 दिसंबर 1882 को जन्मे महान स्वतंत्रता सेनानी, कवि और समाज सुधारक सुब्रमण्यम भारती के जन्मदिवस को केंद्र सरकार ने भारतीय भाषा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि भारत एक बहुभाषी राष्ट्र है और भाषाई समन्वय तभी संभव है जब प्रत्येक नागरिक अपनी मातृभाषा के साथ-साथ कम से कम एक अन्य भारतीय भाषा सीखे। उन्होंने सुब्रमण्यम भारती के भाषाई योगदान को स्मरण करते हुए सभी से भाषाई विविधता को सम्मान देने का आग्रह किया।

मुख्य वक्ता डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि भारतीय भाषाएं जोड़ने का कार्य करती हैं और ‘मेरा देश, मेरी भाषा’ की भावना राष्ट्रीय एकता का आधार है। उन्होंने मातृभाषा के साथ अन्य भारतीय भाषाओं को सीखने तथा हस्ताक्षर मातृभाषा में करने का संकल्प लेने पर बल दिया।

मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति आर. महादेवन ने कहा कि भाषाई स्वाभिमान के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता अधूरी है। उन्होंने भारतीय भाषाओं की विविधता को भारत की ताकत बताते हुए सभी भाषाओं के संरक्षण, सम्मान और समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम का समापन अध्यक्षीय धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर भारतीय भाषा दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित 14 दिवसीय पखवाड़ा कार्यक्रम का भी समापन किया गया, जिसने भाषाई सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का सशक्त संदेश दिया।