अमलीपदर, 24 दिसंबर 2025। हिन्दी साहित्य की धरोहर और छत्तीसगढ़ की शान पं. सुंदरलाल शर्मा की जयंती इस बार विशेष रही। गरियाबंद जिले के अमलीपदर में साहू छात्रावास भवन में साहित्यकारों का जमावड़ा हुआ। आयोजन त्रिवेणी संगम साहित्य समिति ने किया। इस साहित्यिक आयोजन में छत्तीसगढ़ के लगभग 10 जिलों के साथ-साथ महाराष्ट्र के नागपुर और राजस्थान के जोधपुर से बड़ी संख्या में कवि एवं साहित्यकार पहुंचे, जिससे पूरा वातावरण साहित्यिक ऊर्जा से सराबोर रहा। इस मौके पर त्रिवेणी संगम साहित्य रत्न सम्मान 2025 कवि रामेश्वर साहू ‘रंगीला’ को प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजिम विधायक रोहित साहू ने अपने उद्बोधन में कहा कि पंडित सुंदरलाल शर्मा ने इसी पावन भूमि पर जन्म लेकर समाज सुधार, समरसता और स्वतंत्रता आंदोलन में ऐतिहासिक योगदान दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य की परिकल्पना भी पंडित सुंदरलाल शर्मा ने ही की थी, जो आज साकार होकर हमारे सामने है।
यह हम सभी के लिए गर्व का विषय है कि ऐसे महान व्यक्तित्व की कर्मभूमि पर हम रहते हैं। विधायक साहू ने त्रिवेणी संगम साहित्य समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन आने वाली पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ने का प्रेरक कार्य कर रहा है। उन्होंने आगामी 1 फरवरी से राजिम कुंभ कल्प मेले में क्षेत्रीय साहित्यकारों के लिए अलग मंच और कार्यालय की व्यवस्था का प्रयास करने की बात भी कही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने राजिम को साहित्य का शक्तिपीठ एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि जिस भूमि पर श्रेष्ठ साहित्यकार जन्म लेते हैं, वह क्षेत्र साहित्य का शक्तिपीठ बन जाता है और राजिम ऐसी ही पुण्यभूमि है। उन्होंने राजभाषा आयोग की गतिविधियों की जानकारी देते हुए नि:शुल्क पुस्तक प्रकाशन एवं विमोचन की योजनाओं पर प्रकाश डाला। अपने उद्बोधन के अंत में उन्होंने अपने पिता पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे की प्रसिद्ध कविता की पंक्तियां सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
विशिष्ट अतिथि नगर पंचायत अध्यक्ष महेश यादव ने कहा कि राजिम पंडित सुंदरलाल शर्मा की कर्मस्थली रही है और यहां के साहित्यिक गौरव को आगे बढ़ाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने राजिम कुंभ मेला में क्षेत्रीय कवियों को पृथक मंच देने की मांग भी रखी। मुख्य वक्ता शिक्षक एवं साहित्यकार श्रवण कुमार साहू ‘प्रखर’ ने कहा कि संत और सिपाही सदैव समाज हित में कार्य करते हैं तथा पंडित सुंदरलाल शर्मा सामाजिक पुनर्जागरण के महामानव थे, जिनकी विरासत को आगे बढ़ाना साहित्यकारों का परम कर्तव्य है।
काव्य पाठ प्रतियोगिता में निर्णायकों भारत लाल साहू, कोमल सिंह साहू एवं पोयम शरण साहू के निर्णयानुसार प्रथम स्थान बेमेतरा जिले के कवि दिलीप टिकरिहा, द्वितीय स्थान आरंग के जुगेसचंद्र दास, तृतीय स्थान दुर्ग की शशि तिवारी, चतुर्थ स्थान छुरा के सूरज प्रकाश तथा पंचम स्थान बलौदा बाजार की डॉ. तुलेश्वरी धुरंधर ने प्राप्त किया।
कार्यक्रम में सरपंच संघ फिंगेश्वर के अध्यक्ष हरीश साहू, नगर पंचायत सभापति आकाश सिंह राजपूत, त्रिवेणी संगम साहित्य समिति के अध्यक्ष मकसूदन साहू बरीवाला सहित अनेक साहित्यकार, कवि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन किशोर निर्मलकर ने किया, वहीं आयोजन की सफलता में समिति के सदस्यों एवं सहयोगियों का विशेष योगदान रहा।













