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अब और शोषण नहीं सहेंगे छत्तीसगढ़ में गनमैन, हक के लिए भरी हुंकार

अब और शोषण नहीं सहेंगे छत्तीसगढ़ में गनमैन, हक के लिए भरी हुंकार

रायपुर, 18 अगस्त 2025। छत्तीसगढ़ के सुरक्षा तंत्र की रीढ़ कहे जाने वाले गनमैन और प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड अब अपने हक और सम्मान की लड़ाई के लिए एकजुट हो रहे हैं। रविवार, 17 अगस्त को राजधानी रायपुर के प्रेस क्लब, मोतीबाग में छत्तीसगढ़ गनमैन प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड वेलफेयर सोसायटी और पूर्व सैनिक कल्याण संघ के संयुक्त तत्वावधान में एक विशाल सम्मेलन आयोजित हुआ। इस आयोजन का नेतृत्व संरक्षक नायब सूबेदार मणि शंकर साहू (रिटायर्ड आर्मी) और सोसायटी के प्रदेश अध्यक्ष नंदकिशोर डड़सेना ने किया। यह सम्मेलन केवल एक सभा नहीं, बल्कि हजारों गनमैनों की दबी आवाज को बुलंद करने का एक ऐतिहासिक प्रयास था।

सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए गनमैन प्रतिनिधियों, संगठन के पदाधिकारियों और वरिष्ठ सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस मंच पर गनमैनों की समस्याओं वेतन विसंगतियों, असुरक्षित कार्य परिस्थितियों, सामाजिक सुरक्षा की कमी और शोषण पर गहन चर्चा हुई। आयोजकों ने बताया कि गनमैन अक्सर अपने अधिकारों से वंचित रहते हैं। सिक्योरिटी एजेंसियां भर्ती शुल्क, वर्दी शुल्क और मासिक वेतन से अवैध कटौती के जरिए उनका शोषण करती हैं। भविष्य निधि (पीएफ), मेडिकल बीमा और आपातकालीन छुट्टियों जैसे बुनियादी अधिकार भी उन्हें नहीं मिलते।

नंदकिशोर डड़सेना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भावुक अपील करते हुए कहा, हम गनमैन समाज की सुरक्षा के लिए दिन-रात डटकर काम करते हैं, लेकिन हमारी अपनी सुरक्षा और सम्मान की कोई गारंटी नहीं। सिक्योरिटी एजेंसियां हमारी मजबूरी का फायदा उठाती हैं। यह सम्मेलन हमारी एकता और शक्ति का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि संगठन ने पहले भी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष को 28 बिंदुओं वाला ज्ञापन सौंपा था। इसमें सिक्योरिटी मॉनिटरिंग कमेटी गठन, सिक्योरिटी पोर्टल, समान वेतनमान, एकसमान वर्दी, पीएफ, ईएसआईसी, बीमा और सुरक्षा प्रहरी योजना के तहत पुत्री विवाह व संतानों के लिए सैनिक स्कूल व उच्च शिक्षा हेतु पैकेज की मांग शामिल थी। इसके अलावा, कुछ जिलों में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से जारी हो रहे शस्त्र लाइसेंस पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई।

सम्मेलन में गनमैनों के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। संगठन ने कानूनी और प्रशासनिक पहल के जरिए अपने अधिकारों की रक्षा करने की रणनीति बनाई। इसके साथ ही, सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए सोसायटी ने रक्तदान शिविर का आयोजन किया, जो उनके सामाजिक कल्याण के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

आयोजन में शामिल वरिष्ठ सदस्यों जैसे विजय प्रकाश गुप्ता, संतोष शर्मा, शेख नईम खान, उपाध्यक्ष दिनेश कुमार टंडन, चोलामगन कौशिक, रूपेश साहू, सुरेंद्र जायसवाल, गोविंदा साहू, विकास यादव, घासीराम साहू, लवन साहू, भूपेंद्र साहू, रेवतराम साहू और शेषनारायण सिंह चौहान ने इस संकल्प को और मजबूती दी।

यह सम्मेलन गनमैनों के लिए एक नई शुरुआत है। यह न केवल उनके शोषण के खिलाफ आवाज उठाने का मंच बना, बल्कि उनके हक और सम्मान की लड़ाई को संगठित रूप देने का भी प्रतीक है। आयोजकों ने शासन-प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है, ताकि गनमैनों को उनका हक मिले और वे सम्मान के साथ जी सकें। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि छत्तीसगढ़ के गनमैन अब चुप नहीं रहेंगे; वे एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ेंगे और समाज में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को और सशक्त करेंगे।