रायगढ़, 5 सितम्बर 2025। 40वें चक्रधर समारोह 2025 में चल रही कबड्डी प्रतियोगिता का खिताब अदाणी फाउंडेशन के नाम रहा। इस प्रतियोगिता में महिला और पुरुष वर्ग की कुल 20 टीमों ने भाग लिया। राज्यसभा सांसद देवेन्द्र प्रताप सिंह ने खिलाड़ियों को पुरस्कार प्रदान किया।
महिला वर्ग का फाइनल मुकाबला अदाणी फाउंडेशन और जिंदल फाउंडेशन की टीमों के बीच रहा। रोमांचक मुकाबले में अदाणी फाउंडेशन की टीम ने 29-19 के स्कोर से शानदार जीत दर्ज की।
अदाणी पावर लिमिटेड के सामाजिक सरोकारों के तहत अदाणी फाउंडेशन द्वारा पिछले तीन वर्षों से स्थानीय खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बालिकाओं को नि:शुल्क कबड्डी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस पहल के तहत अदाणी फाउंडेशन ने कई होनहार बालिकाओं को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेलने और पहचान बनाने का अवसर दिया है। पिछले साल की प्रतियोगिता में अदाणी फाउंडेशन की टीम उपविजेता रही थी और इस साल फाइनल में शानदार प्रदर्शन कर विजेता का खिताब अपने नाम किया।
राज्यसभा सांसद देवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि कबड्डी भारत का सबसे प्राचीन खेल है और चक्रधर समारोह में कबड्डी का आयोजन इस खेल की जीवंतता को बनाए रखने का प्रयास है। अदाणी फाउंडेशन का यह प्रयास कबड्डी खेल को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सराहनीय कदम है।
कबड्डी संघ के अध्यक्ष रघुवीर सिंह बाघवा, डिप्टी कलेक्टर धनराज मरकाम सहित खेल से जुड़े अन्य अधिकारी इस मौके पर मौजूद थे। अदाणी फाउंडेशन की टीम के कोच प्रेम नायक, रतिराम सिदार, परमेश्वर बिश्वाल, परमेश्वर गुप्ता का विशेष योगदान रहा। प्रतियोगिता में अदाणी फाउंडेशन की भूमिका सिदार को बेस्ट आल राउंडर का पुरस्कार मिला, जो उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और टीम के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अदाणी पावर लिमिटेड द्वारा विजेता टीम के खिलाड़ियों और कोच का सम्मान किया गया। शशधरा दास और अजित राय ने विजयी टीम के सभी खिलाड़ियों का सम्मान कर उन्हें प्रोत्साहित किया और भविष्य में भी हर प्रकार के सहयोग का भरोसा दिया।
अदाणी फाउंडेशन द्वारा परिधीय 10 ग्रामों के 50 स्कूली छात्राओं को बेहतरीन कोच द्वारा कबड्डी खेल में प्रशिक्षित किया जा रहा है। टीम की सदस्य बीना सिदार ने कहा कि अदाणी फाउंडेशन के इस कार्यक्रम से स्थानीय खेल और प्रतिभाओं को आगे बढ़ने और बड़े मंच पर प्रदर्शन कर पहचान बनाने का अवसर मिल रहा है। अदाणी फाउंडेशन के निरंतर मार्गदर्शन और प्रयासों से ही यह संभव हो पाया है।














