लखनऊ, 25 दिसंबर 2025। अमन कुमार की कहानी हर उस युवा को प्रेरित करती है जो जीवन में कुछ अनोखा करने की चाहत रखते हैं। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के ट्यौढ़ी गांव का युवा अमन कुमार जिसने कभी साइकिल से अखबार बेंचा, वह आज स्वयंसेवा के क्षेत्र के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान का विजेता है। आइये जानते हैं कि अमन कुमार ने यह उपलब्धि कैसे हासिल की।
स्वयंसेवा के क्षेत्र का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान आई वॉलंटियर यूथ चैंपियन पुरस्कार 2025 इस वर्ष पहली बार उत्तर प्रदेश के नाम दर्ज हुआ है, और यह गौरव अमन कुमार को मिला है। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष देश के केवल एक युवा को दिया जाता है।
एक सवाल ने बदल दी जिंदगी
अमन कुमार का बचपन आर्थिक अभाव और सामाजिक असमानताओं के बीच बीता। पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्हें गांव-गांव साइकिल से अख़बार बेचने पड़े। कई बार बाल मजदूरी जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इन्हीं संघर्षों ने उनके मन में यह सवाल पैदा किया कि अवसर कुछ गिने-चुने लोगों तक ही क्यों सीमित रहते हैं। यहीं से उनके जीवन की दिशा बदल गई और उन्होंने समाज के लिए कुछ करने का संकल्प लिया।
आईटी सेक्टर में बेहतर करियर की संभावनाएं होने के बावजूद अमन ने सुरक्षित नौकरी छोड़कर स्वयंसेवा को अपना मार्ग चुना। यह निर्णय जोखिम भरा था, लेकिन उनका विश्वास था कि जब तक सही अवसरों की जानकारी गांवों और दूरदराज़ इलाकों तक नहीं पहुंचेगी, तब तक असमानता खत्म नहीं होगी। इसी सोच से प्रोजेक्ट कॉन्टेस्ट 360 का जन्म हुआ। एक डिजिटल प्लेटफॉर्म, जो शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, स्कॉलरशिप और करियर से जुड़े अवसरों की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध कराता है। आज यह पहल देशभर में 83 लाख से अधिक युवाओं तक पहुंच बना चुकी है और ग्रामीण युवाओं के लिए आगे बढ़ने का मजबूत रास्ता बनी है।
अमन का योगदान केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने बागपत प्रशासन के साथ मिलकर कांवड़ यात्रा ऐप, स्वीप बागपत ऐप, सूचना सेतु और बागपत फॉर एनिमल्स जैसे ई-गवर्नेंस नवाचारों में अहम भूमिका निभाई। इन पहलों से नागरिक सेवाओं की पहुंच, पारदर्शिता और प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार हुआ। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि अमन जैसे युवा शासन और समाज के बीच सेतु बनकर उभर रहे हैं।
आई वॉलंटियर संस्था द्वारा देशभर से चुने गए टॉप 10 युवाओं में स्थान पाने के बाद मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में अमन को यूथ चैंपियन घोषित किया गया। सम्मान के पश्चात जनपद आगमन पर सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान और जिलाधिकारी आईएएस अस्मिता लाल ने उन्हें सम्मानित करते हुए जिले के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित माय भारत मुख्यालय में उनके योगदान की सराहना की और उन्हें उत्तर प्रदेश में माय भारत यूथ मेंटोर के रूप में चयनित किया।
अमन कुमार यूनिसेफ, यूनेस्को सहित कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों से जुड़े रहे हैं। वे 78वें और 79वें स्वतंत्रता दिवस पर भारत सरकार के विशेष युवा अतिथि भी रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार उन्हें स्वामी विवेकानन्द राज्य युवा पुरस्कार से सम्मानित कर चुकी है। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के मार्गदर्शन में उन्होंने सत्यार्थी समर स्कूल में भी सहभागिता की।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2026 को इंटरनेशनल ईयर ऑफ वॉलंटियर्स फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट घोषित किए जाने के दौर में, बागपत के एक छोटे से गांव से निकले अमन कुमार का यह राष्ट्रीय सम्मान इस बात का प्रतीक है कि स्वयंसेवा अब केवल सेवा नहीं, बल्कि नीति, प्रशासन और सतत विकास का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है। अमन की कहानी लाखों युवाओं के लिए यह संदेश है कि सही सोच और निरंतर प्रयास से कोई भी गांव से वैश्विक मंच तक अपनी पहचान बना सकता है।













