रायपुर, 16 सितंबर 2025। छत्तीसगढ़ में आंगनबाडी कार्यकर्ता 19 सितम्बर को प्रदेश के समस्त आंगनबाडी केन्द्र बंद कर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय रायपुर के समक्ष जंगी प्रदर्शन करेंगे। मंगलवार को रायपुर प्रेस क्लब में पत्रकारवार्ता कर संगठन के पदाधिकारियों ने इसकी जानकारी दी।
पदाधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में सरकार की तरफ से केन्द्र संचालन के लिये झाडू, पोछा, फिनाईल, बाल्टी, मग्गा, कागज, फोटोकापी इत्यादि के लिये भी कोई कन्टीजेसी राशि नहीं दी जा रही है। सरकार द्वारा आंगनबाडी का काम अब पूर्ण डिजीटलाईज कर दिया गया है।
पोषण आहार वितरण, टीएचआर, फेस कैपचर, सम्मान निधि प्रणाली से कार्यकर्ता, बच्चों, केन्द्र के गतिविधियों का फोटो कैप्चर, हितग्राहियो से ओटीपी लेना, रिकार्ड ये सब मोबाईल के माध्यम से ही करना है लेकिन 5जी मोबाईल की उपलब्धता नहीं है। नेट चार्ज राशि नहीं है। दूराचंल और वनांचल मे नेट ब्यवस्था नही है। शासन प्रशासन का इस ओर ध्यान नही है।
संयुक्त मंच की 8 सूत्रीय मांग
- देश मे 50 वर्ष से लागू आईसीडीएस योजना के तहत आंगनबाडी केन्द्रों में कार्यरत कार्यकर्ता सहायिकाओं को भी शिक्षाकर्मी, पंचायत कर्मी की तरह शासकीय करण की नीति बनाकर शासकीय कर्मचारी घोषित किया और कार्यकर्ता को तृतीय श्रेणी और सहायिका को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी घोषित किया जाए।
- शासकीय कर्मचारी घोषित होते तक पूरे देश में एक समान वेतन कार्यकर्ता को प्रतिमाह 26000/- और सहायिका को 22100/- (कार्यकर्ता का 85%) शीघ्र लागू किया जाए।
- समाजिक सुरक्षा के रूप मे सेवानिवृत्ति पर सभी कार्यकर्ता सहायिकाओं को पेंशन, ग्रेच्युटी, समूह बीमा और कैशलेश चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
- सहायिका को कार्यकर्ता के पद पर और कार्यकर्ता को सुपरवाईजर के पद पर सिधे पदोन्नति दिया जाए।
- मंहगाई भत्ता दिया जाए।
- उच्च न्यायालय गुजरात द्वारा ग्रेच्युटी और न्यूनतम वेतन के संबध मे पारित निर्णय को छत्तीसगढ़ मे भी लागू किया जाए।
- 35-40 वर्ष विभाग की सेवा करने के बाद भी बुढ़ापे के समय जीवन यापन के लिए पेंशन दिया जाए।
- कार्यकर्ता, सहायिका के आकस्मिक मृत्यु होने पर परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दिया जाए।














