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छत्तीसगढ़ में 13 अगस्त को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं देंगी धरना

छत्तीसगढ़ में 13 अगस्त को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं देंगी धरना

रायपुर, 12 अगस्त 2025। छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी लंबित मांगों को लेकर 13 अगस्त 2025 को एक दिवसीय ध्यानाकर्षण धरना देने जा रही हैं। यह आंदोलन राजधानी रायपुर सहित सभी जिलों में एक साथ होगा। आंगनबाड़ी संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि इस धरने के बाद भी सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो 1 सितंबर 2025 को राज्यभर के लाखों महिला कार्यकर्ता और सहायिकाएं प्रांत स्तरीय धरना देने के लिए मजबूर होंगी।

रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएं वर्ष 1975 से महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत सेवाएं दे रही हैं। वर्तमान में प्रदेश में 1 लाख से अधिक कार्यकर्ता-सहायिकाएं गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों के टीकाकरण, पोषण, अनौपचारिक शिक्षा, कुपोषण निवारण, सुपोषण योजना, गोद भराई, अन्न प्राशन, बाल भोज, मुख्यमंत्री कन्या विवाह, शाला प्रवेश उत्सव, नोनी सुरक्षा योजना, सुकन्या समृद्धि योजना और मातृत्व योजनाओं सहित 16 सरकारी योजनाओं पर काम कर रही हैं।

इसके अतिरिक्त, वे अन्य विभागीय कार्य जैसे राशन कार्ड, स्वास्थ्य बीमा, पल्स पोलियो, निर्वाचन कार्य, जनगणना, आर्थिक सर्वेक्षण, स्वच्छ भारत मिशन, किशोरी बालिका स्वास्थ्य, गृह भेंट, विधवा-परित्यक्ता सर्वेक्षण और आयुष्मति योजना के तहत जिम्मेदारियां निभा रही हैं। बावजूद इसके, संसाधनों और सुविधाओं के अभाव में वे अपने निजी मोबाइल से पोषण ट्रेकर जैसे जटिल ऑनलाइन कार्य भी कर रही हैं, जिससे कई बार हितग्राहियों की नाराजगी और गाली-गलौज झेलनी पड़ती है।

संघ ने बताया कि इन सभी कार्यों के एवज में कार्यकर्ता को मात्र ₹10,000 और सहायिका को ₹5,000 मानदेय मिलता है, जिसमें राज्य सरकार ₹5,500 और केंद्र सरकार ₹4,500 का योगदान देती है। पहले उनका कार्य समय 4 घंटे था, जिसे बढ़ाकर 6 घंटे कर दिया गया है, लेकिन वास्तविकता में वे कई बार 8-10 घंटे तक काम करती हैं। उन्हें श्रम कानूनों के तहत न तो कलेक्टर दर का भुगतान मिलता है और न ही उनका वर्गीकरण किया गया है।

पदाधिकारियों ने कहा कि पूरे भारत में छत्तीसगढ़ की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की स्थिति सबसे दयनीय है। जबकि छोटे से राज्य पुदुचेरी में इन्हें शासकीय कर्मचारी का दर्जा देकर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी वेतनमान दिया जा रहा है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में विधवा और परित्यक्ता महिलाओं के लिए ₹10,000 और ₹5,000 की आय में घर चलाना असंभव है।

संघ का आरोप है कि उन्होंने पहले भी बूढ़ातालाब तुता में भीषण गर्मी, बरसात और ठंड में छोटे बच्चों को साथ लेकर आंदोलन किए, लेकिन शासन ने उनकी मांगों पर संवेदनशीलता नहीं दिखाई। आंगनबाड़ी महिलाओं का कहना है कि अब वे चुप नहीं बैठेंगी और अपने अधिकारों के लिए आंदोलन को तेज करेंगी।