लखनऊ, 7 मार्च 2026। हौसले बुलंद हों और इरादे नेक, तो गरीबी कभी कामयाबी के रास्ते का रोड़ा नहीं बनती। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के एक साधारण टेंपो चालक के बेटे अनिल मिश्रा ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 445वीं रैंक हासिल कर इस बात को सच साबित कर दिया है। अनिल की इस सफलता ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे जनपद का मान बढ़ाया है।
मूल रूप से कुशीनगर के रहसू जनोबीपट्टी गांव के रहने वाले सुरेंद्र मिश्रा पिछले 30 वर्षों से देवरिया के तरकुलवा नगर पंचायत (मीराबाई नगर) में रह रहे हैं। परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सुरेंद्र मिश्रा आज भी टेंपो चलाते हैं। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा में कभी कमी नहीं आने दी। उनकी इसी तपस्या का फल है कि आज उनका सबसे छोटा बेटा अनिल मिश्रा देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा के लिए चुना गया है।
कभी कोचिंग नहीं की
अनिल मिश्रा की सफलता की कहानी उन लाखों अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा है जो महंगी कोचिंग के अभाव में हार मान लेते हैं। अनिल ने अपनी पूरी तैयारी सेल्फ स्टडी के जरिए घर पर रहकर ही पूरी की। विद्या मंदिर देवरिया से साल 2017 में हाईस्कूल और 2019 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। साल 2022 में रमेश चंद्र राव नवतप्पी महाविद्यालय, रामपुरगढ़ से स्नातक (BA) की डिग्री हासिल की।
स्नातक के तुरंत बाद अनिल यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। 2024 के पहले प्रयास में वह साक्षात्कार (Interview) तक पहुंचकर चूक गए थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और 2025 में अपने दूसरे प्रयास में IAS बनने का गौरव हासिल किया।
एक ही घर में तीन अधिकारी
अनिल के दो बड़े भाई भी देश की सेवा में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात हैं। श्रवण मिश्रा सीमा सुरक्षा बल (BSF) में देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। अभय मिश्रा आयकर विभाग (Income Tax) में अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।
बधाई देने वालों का लगा तांता
जैसे ही यूपीएससी का परिणाम घोषित हुआ, तरकुलवा कस्बा स्थित अनिल के आवास पर खुशियों की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोग और शुभचिंतक ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के साथ परिवार को बधाई देने पहुँच रहे हैं। पिता सुरेंद्र मिश्रा भावुक होकर कहते हैं, बेटे ने अपनी मेहनत के दम पर यह मुकाम पाया है, यह उसकी लगन का ही परिणाम है।















